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जिला अस्पताल में पेट का ऑपरेशन कर गठान निकाली, तो वर्षा हुई स्वस्थ

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जिला अस्पताल में पेट का ऑपरेशन कर गठान निकाली, तो वर्षा हुई स्वस्थ

परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टर्स के प्रयासों की सराहना की

18 वर्षीय कुमारी वर्षा पिता श्री मेहताब जो कि पिछले 8 वर्ष से पेट दर्द से परेशान थी। उसके परिजनों ने महाराष्ट्र के जालना में डॉक्टर्स को दिखाया तो सोनोग्राफी करवाने पर पता चला कि बच्ची के पेट में गठान है जिसमें ऑपरेशन का खर्चा लगभग 50 हजार बताया। जिला अस्पताल खण्डवा में वर्षा का निःशुल्क ऑपरेशन हो गया। अब वर्षा बिल्कुल स्वस्थ है और वह जिला अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम की सराहना करती है।
पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के साथ खरगोन जिले के ग्राम नीमखेड़ा चैनपुर निवासी वर्षा को उसके परिजन 1 नवंबर को जिला चिकित्सालय खंडवा के जनरल सर्जरी ओ.पी.डी. में लेकर आए थे, जहां पर सर्जरी रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज जैन ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया तो ज्ञात हुआ कि वर्षा को कोलेडोंकल सिस्ट टाइप 4 पित्त की थैली की नली में गठान है, जिसके कारण उसे दर्द हो रहा है। डॉक्टर्स ने परिजनों को बताया कि वर्षा का पेट दर्द ऑपरेशन कराने के बाद ठीक हो जाएगा। वर्षा के परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार हो गए और आपातकालीन स्थिति में तत्काल सर्जरी रोग विशेषज्ञ डॉ. सूरज जैन, डॉ. अरुण पारगी, डॉ. रिंकू यादव, डॉ. वीरेंद्र पाचोले, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. भारती, डॉ. रानी एवं हेड ऑफ डिपार्टर्मेंट डॉ. अजय गंग के मार्गदर्शन में गठान का सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया। सर्जरी अत्यधिक जटिल होने के कारण लगभग 5 घंटे चली।
सिविल सर्जन डॉ. अनिरूद्ध कौशल ने बताया कि इस तरह की सर्जरी अक्सर बड़े शहरों में ही होती थी, परंतु जिला चिकित्सालय खंडवा में यह सर्जरी हो गई। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद वर्षा की स्थिति नाजुक थी किंतु डॉक्टर्स की टीम द्वारा लगातार निगरानी की गई, जिससे उसकी स्थिति में सुधार होने लगा और धीरे-धीरे वर्षा की स्थिति सामान्य हो गई। वर्षा अब पूरी तरह स्वस्थ है। वर्षा के पिता मेहताब ने बताया कि वे अपनी बेटी को गंभीर हालत में जब खण्डवा अस्पताल में लेकर आये थे, तो उस समय लग रहा था कि वर्षा को इंदौर ले जाना पड़ेगा परंतु डॉ. सूरज जैन एवं उनकी टीम ने वर्षा का सफलता पूर्वक ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। इसके लिए वर्षा और उसके पिता मेहताब जिला अस्पताल के डॉक्टर्स की टीम की सराहना करते नहीं थकते।

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