दण्डी स्वामी वैभवानंद सरस्वती की मनायी गयी पुण्यतिथि, संस्कृत भाषा के उन्नयन का लिया गया सामूहिक संकल्प
केदारघाट स्थित स्वामी करपात्री आश्रम में धर्मसम्राट करपात्री जी की स्मृति को नमन करते अनुयायी
वाराणसी। केदार घाट स्थित धर्मसम्राट जगदगुरू स्वामी करपात्री जी के आश्रम में सोमवार को संस्कृत विद्वान दण्डी स्वामी वैभवानंद सरस्वती जी महराज की पन्द्रहवीं पुण्यतिथि मनायी गयी। अनुयायियों ने दण्डी स्वामी वैभवानंद सरस्वती जी महराज की स्मृति में सनातन, संस्कृत एवं संस्कृति के प्रचार प्रसार को लेकर समर्पण का सामूहिक संकल्प जताया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विजयानंद सरस्वती एवं श्रीरामचरितमानस राष्ट्रीय ग्रन्थ संरक्षा अभियान के संयोजक ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महराज की प्रतिमा पर पुष्पार्जन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। आश्रम के स्वामी राधेकृष्ण एवं स्वामी चंद्रेश्वरानंद सरस्वती जी एवं स्वामी चैतन्यानंद जी तथा स्वामी शिवानंद जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य मां गंगा की आरती व गो-तुलसी पूजन किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत परिषद के अध्यक्ष आचार्य राजेश मिश्र ने दण्डी स्वामी वैभवानंद सरस्वती जी के संस्कृत भाषा के क्षेत्र में शोध प्रबंधन तथा लेखन व व्याकरण शुद्धीकरण पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल त्रिपाठी महेश व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास मिश्र ने प्रतापगढ़ जनपद के मूल निवासी आचार्य पं. शंकरदत्त मिश्र के दण्ड ग्रहण करने से पूर्व प्रतापगढ़ समेत आसपास के जिलों में संस्कृत विद्यालयों की पुर्नस्थापना एवं वटुक छात्रों के शैक्षिक संवर्धन में दिये गये योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य पं. हरिशंकर मिश्र व संचालन डॉ. जी. गणेशम ने किया। कार्यक्रम के दौरान दण्डी स्वामी वैभवानंद सरस्वती जी की स्मृतांजलि में आश्रम में सैकड़ो दण्डीस्वामियों व वटुक छात्रों को भण्डारे में संस्कृत महाप्रसाद भोज ग्रहण कराया गया। इस मौके पर प्रो. विजय कुमार पाण्डेय, पं. धर्मराज पाण्डेय, दिनेश सिंह, आर. शिवम, पूर्णिमा मिश्रा, हरिश्चंद्र अग्रहरि आदि रहे। आभार प्रदर्शन प्रो. डॉ. बृजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेष ने किया।











