
*समर्थगुरु धारा से गूंजा आध्यात्मिक संदेश: बुद्ध के मार्ग पर आत्मजागृति ही जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि*
खंडवा/
समर्थ गुरुधारा मैत्री संघ, खंडवा द्वारा बुद्ध पूर्णिमा उत्सव गहन आध्यात्मिक वातावरण और उल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साधकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ ओशो एवं भगवान शंकर की आरती से हुआ। इसके बाद भगवान बुद्ध की देशना पर स्वामी प्रेम सुमन एवं स्वामी आनंद देव ने सत्संग के माध्यम से जीवन में ध्यान, जागरूकता और आंतरिक शांति के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
जिला संयोजक स्वामी तथागत प्रवीण ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का दिव्य अवसर है। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध के मार्ग पर चलकर मनुष्य अपने भीतर की असीम संभावनाओं को जागृत कर सकता है और सच्चे सुख व शांति को प्राप्त कर सकता है। उनके संदेश ने उपस्थित साधकों को गहराई से प्रेरित किया।
जिला वूमेन इंपावरमेंट संयोजक मां प्रेम साकी ने आध्यात्मिक यात्रा के महत्व को समझाते हुए साधना को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान सभी साधकों ने “विपश्यना ध्यान” का अभ्यास कर अपनी भीतरी चेतना से जुड़ने का अनुभव किया, जिससे पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा और शांति से भर गया।
इस अवसर पर स्वामी नरेंद्र सोलंकी, विनेश पगारे, गौरव यादव, सुभाष दुबे, अशोक अहूजा, वरिष्ठ साधक गोविंदा काटे सहित अनेक साधक उपस्थित रहे। वहीं मां प्रेम मृदु, मां सत्य आकांक्षा, मां प्रेम अविनाशी, डॉ. स्वाति दुबे, मां रेखा काटे, मां आशा, मां तनीषा, मां सावित्री सहित सभी साधकों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का समापन रात्रि भोज के साथ हुआ। पूरे आयोजन में साधकों ने आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते हुए संतों एवं गुरुओं के प्रति गहरी श्रद्धा और आभार व्यक्त किया।






