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*प्रथम बार आयोजित दो दिवसीय अंतर प्रांतीय सिंधी साहित्य सम्मेलन प्रारंभ*

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*प्रथम बार आयोजित दो दिवसीय अंतर प्रांतीय सिंधी साहित्य सम्मेलन प्रारंभ*

*खंडवा नगर के वरिष्ठ सिंधी, हिंदी साहित्यकार, लेखक, पत्रकार निर्मल मंगवानी भी हुए शामिल*

खंडवा। मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग भोपाल के तत्वावधान में सिन्धी साहित्य अकादमी व्दारा प्रथम बार आयोजित दो दिवसीय अंतर प्रांतीय सिंधी साहित्य सम्मेलन एवं संत हिरदाराम साहित्य गौरव सम्मान समारोह शनिवार को प्रारंभ हुआ। खंडवा नगर के वरिष्ठ सिंधी, हिंदी साहित्यकार, लेखक निर्मल मंगवानी शामिल हुए। यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय सिंधी समाज प्रदेश प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि उदघाटन सत्र सिन्धी साहित्य लोक से विश्व तक विषय में मुख्य अतिथि के रूप में संत हिरदाराम साहिब कुटिया प्रमुख परम् श्रद्धेय सिध्द भाऊ, विशेष अतिथि के रूप में भोपाल दक्षिण पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, मोहन गेहानी, डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी, सिन्धी साहित्य अकादमी निदेशक राजेश वाधवानी मंचासीन रहे। डॉ. टेकचंदानी ने सिंधी भाषा एवं समाज के अनेक आयामों का विस्तृत उल्लेख कर सिंधी समाज को एक जूट होने की बात कही। श्री सबनानी ने अपने उदबोधन में कहा कि 14 अगस्त की विभीषिका को हमेशा कार्यक्रम आयोजित कर नयी पीढी़ को बताना चाहिए। हमें पूर्व स्मृति को नहीं भूलना चाहिए। हमें अपने संस्कारों, संस्कृति, भाषा को आने वाली पीढ़ी को बताया होगा। परम् श्रद्धेय सिध्द भाऊजी ने उपस्थित साहित्य सर्जनकारों से मातृभाषा के विस्तार हेतु सटीक प्रयास करने की अपील की। इस मौके पर अकादमी व्दारा प्रकाशित वार्षिक पुस्तक सिन्धु मशाल का विमोचन हुआ। वही संत हिरदाराम साहित्य गौरव सम्मान से श्री नारी लच्छवाणी, नन्दकुमार सनमुखानी, डॉ. नादिया मसंद सहित तीनों साहित्यकारों को सिंधी साहित्य अकादमी व्दारा एक-एक लाख रूप की सम्मान राशि का चैक भेट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कविता ईसरानी एवं आभार हर्षा मूलचंदानी ने माना। सम्मेलन का दिव्तीय सत्र वरिष्ठ साहित्यकार खीमन यू. मूलाणी की अध्यक्षता एवं नारी लच्छवाणी, निदेशक राजेश वाधवानी की उपस्थिति में आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता डॉ. तुलसीदेवी ने सिन्धियत के विस्तार में सिन्धी सन्त साहित्य का योगदान विषय पर अपना सारगर्भित आलेख प्रस्तुत किया। वही भारत में कार्यरत समस्त साहित्य अकादमियों से अपील करते हुए कहा कि भाषा के विस्तार के लिये ठोस कार्य किये जाना चाहिए। वही नंदनी पंजवानी ने विषय पर भूमिका बांधी। तृतीय सत्र में सिन्धी साहित्य में राष्ट्र भक्ति का तत्व विषय पर मुख्य वक्ता डॉ. कल्पना चेलानी बडोदा ने आलेख प्रस्तुत किया। विषय की भूमिका नंदकुमार सनमुखानी ने बांधी। अध्यक्षता डॉ. रविप्रकाश टेकचंदानी ने की। सत्र का संचालन कन्हैया शेवाणी ने किया। चतुर्थ सत्र में सिंधी साहित्य में आत्मकथाओं का सफ़रनामा विषय पर मुख्य वक्ता कैलाश शादाब ने सारगर्भित आलेख प्रस्तुत किया। भग॒वान बा॒बा॒णी ने विषय की भूमिका बांधी। अध्यक्षता डॉ. जे॒ठो लालवाणी ने की। सत्र का संचालन नमोश तलरेजा ने किया। रात्रि में सिन्धू महोत्सव के अंतर्गत निखिल आर राजपाल व्दारा लिखित सिंधी नाटक ओ मेरे झुलेलाल साईं का मंचन सिंधु सखा संगम के कलाकारों व्दारा मुम्बई की जुली तेजवानी के दिशानिर्देश में किया गया। इस मौके पर अहमदाबाद के वरिष्ठ सिन्धी साहित्यकार डॉ. जेठो लालवानी, , रश्मि रामाणी, भगवान बाबाणी, सुरेन्द्र लच्छवानी, निर्मल मंगवानी, मनीष मलानी खंडवा, इंदौर, बैरागढ़, भोपाल, जबलपुर, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश अयोध्या, गुजरात आदिपुर कच्छ, महाराष्ट्र मुम्बई, कल्याण, राजस्थान जोधपुर, जयपुर, गोवा, दिल्ली, सहित भारत भर के अनेक शहरों से लगभग 135 साहित्य सर्जन मौजूद थे।

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