
सामाजिक समरसता के भाव को लेकर जगह-जगह हुए भंडारे,झूठी पत्तले उठाने की लगी बोली।

माता की विदाई के पूर्व जगह-जगह हुए भंडारे विधायक महापौर हुई शामिल।
पूरा नगर गणगौर मय हुआ धार्मिक आस्था के साथ माता की हुई विदाई।
खंडवा। भारतीय संस्कृति के अनुरूप धर्म की प्रभावना से निमाड़ का यह गणगौर पर्व लगातार अपनी ऊंचाईयों को छू रहा है। यह पर्व राजस्थान का प्रमुख माना जाता था लेकिन अब मप्र के मालवा-निमाड़ में धार्मिक उत्साह के साथ चैत्र नवरात्रि नौ दिनों तक हर्षोल्लास से मनाया जाता है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि गणगौर पर्व का तीन दिनोंतक काफी उत्साह रहता है। पर्व के अनेक कार्यक्रमों के साथ प्राचीन संस्कृति का एक अद्भूत उदाहरण खंडवा में देखा जा सकता है जब माता की विदाई के पूर्व भंडारों का आयोजन होता है और श्रद्धालुओं को भोजन की पत्तल लगाने से लेकर उनकी झूठी पत्तलें उठाने को भी उत्साह रहता है। झूठी पत्तल उठाने के लिए बढ़चढ़ कर बोलियां लगती है और यह बोलियां हजारों रूपयों में लगती है। पत्तल उठाने वाले अपने आपको इस कार्य के लिए भाग्यशाली मानते है और यह माना जाता है कि इस कार्य से पुण्य की प्राप्त होती है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि निमाड़ में चैत्र नवरात्रि का पर्व पारंपरिक व सामूहिक रूप से मनाया जा रहा है। गणगौर पर्व अंतिम दिन जवारे विसर्जन के साथ संपन्न हुआ। रनुबाई-धनियर राजा को गाजे-बाजे व ढोल-ढमाकों के साथ मायके से विदाई दी गई। ढोल-ढमाकों के व युवा के उत्साह के साथ शहर का हृदय स्थल घंटाघर और बांबे बाजार पूरी तरह गणगौर मय हुआ और अलग-अलग क्षेत्रों व समाजों द्वारा सर पर रणुबाई और धनियर राजा के रथ लेकर निकली। अंत में गणगौर घाट पहुंचकर जवारों का विसर्जन नम आंखों से किया। गणगौर उत्सव समिति बांबे बाजार कुम्हार मोहल्ला में तीन दिनों से गणगौर उत्सव की धूम रही। अंतिम दिन गणगौर माता को पूजा पाठ आरती करते हुए झूले झुलाए गए। वहीं विशाल भंडारा भी आयोजित हुआ जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। वहीं झूठी पत्तल दानदाताओं के परिवार द्वारा उठाई गई। लगातार भंडारे में श्रद्धालुओं की पत्तल उठाने की बोलियां लगातार लगती रही। मालवीया परिवार द्वारा बड़ी बोली लगाकर पत्तल उठाई गई। आयोजित कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों सहित समाज जनों ने उपस्थित होकर ने उपस्थित होकर इस आयोजन को सफल बनाया। रनुबाई को माता पार्वती के रूप में अपने घर में रखने के बाद जयकारों के साथ विदाई दी गई। पूरा निमाड़ गौर माता के जयकारों से गुंजायमान था मानो आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा हो। शहर के विभिन्न मार्ग रथों को गणगौर घाट ले जा रहे श्रद्धालुओं से सटे पड़े थे। श्रद्धालुओंं द्वारा माता के जवारों को रथों के साथ ले जाकर घाट पर पूजा-अर्चना कर विसर्जित किया गया। पर्व के अंतिम दिन सोमवार को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर में भी माता भोज के आयोजन किए गए। निमाड़ में ऐसे कई समाज गुरव समाज, प्रजापति समाज,झमराल समाज कहार समाज हैं जिनके द्वारा इस भोज में खाने से लेकर झूठी पत्तलें उठाने तक की बोलियां लगाई जाती है। मेहमानों को खाना खिलाने से लेकर उनकी झूठी पत्तलें उठाने तक में अधिक से अधिक पुण्य मिले इसके लिए बड़ी से बड़ी बोली लगाई जाती है। गुरव समाज पंचायत गुप्तेश्वर शिव मंदिर द्वारा इस वर्ष तापड़िया गार्डन में माता के पूजन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। यहां पत्तल लगाने व उठाने की बोलियां लगाई गई। शनिवार को समाज के लोगों ने झूठी पत्तल उठाने की बोली लगाई। बोली 501 रूपए से शुरू हुई बोली 5 हजार रूपए तक पहुंची। प्रथम एवं दूसरी बोली उदय परिवार एवं परदेसी परिवार द्वारा प्राप्त की गई समाजजनों नेहा जुगल सावनेर राधाबाई काले परिवार रितेश काले,रितेशा सोमनाथ काले, हर्ष काशीनाथ काले, अमित काले एवं पूरे समाज द्वारा भंडारे में सहयोग स्वरूप दान भी दिया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अध्यक्ष अशोक जुगल शर्मा सावनेर, सचिव अजय परदेसी उपाध्यक्ष लोकेश भद्रवाले दीपक शर्मा, घनश्याम निमाड़े, पार्षद सोमनाथ काले, भरत कुवादे, विजय पांजरे, मनोज निमाड़े सहित समाज के पदाधिकारी एवं युवा कार्य कार्यकर्ताओं का सहयोग महत्वपूर्ण रूप से रहा। भंडारे में महापौर अमृता यादव, विधायक कंचन तनवे, ने भी उपस्थित होकर माता की पूजा अर्चना कर प्रसादी ग्रहण की। संचालन दीपक शर्मा ने किया। आभार अध्यक्ष जुगल सावनेर व सोमनाथ काले ने माना।










