
*ओशो संबोधि उत्सव हर्षोल्लास से संपन्न,* *साधकों ने लिया ध्यान व सत्संग का आनंद*
*संबोधि भीतर जागने की प्रक्रिया है – स्वामी तथागत प्रवीण*
खंडवा//
समर्थगुरुधारा ध्यान सेवा संघ खंडवा द्वारा “ओशो संबोधि उत्सव कार्यक्रम” का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधकों ने उपस्थित होकर ध्यान, सत्संग और उत्सव का आनंद लिया। कार्यक्रम का आयोजन राज्य संयोजिका सीमा मां के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला संयोजक स्वामी तथागत प्रवीण द्वारा हनुमान जी एवं भगवान शंकर जी की आरती के साथ की गई। इसके पश्चात परम गुरु ओशो का स्मरण करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इसके बाद साधकों ने ओशो की अमृत वाणी के माध्यम से “संबोधि क्या है” विषय पर गहन सत्संग का आनंद लिया। कार्यक्रम में स्वामी आनंद देव जी ने समर्थगुरुदेव के अनुसार एवं ओशो द्वारा कथित बोध कथाओं के माध्यम से संबोधि के रहस्य को सरल रूप में समझाया।
इस अवसर पर जिला संयोजक स्वामी तथागत प्रवीण ने अपने उद्बोधन में कहा कि संबोधि कोई चमत्कार नहीं बल्कि जागरूक जीवन की अवस्था है। जब व्यक्ति स्वयं को देखना शुरू करता है, तब भीतर की शांति प्रकट होती है। समर्थगुरु और ओशो की साधना परंपरा हमें अपने ही अंतर में उतरने का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सभी साधकों से नियमित ध्यान, सत्संग और जागरूकता के अभ्यास को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर सुभाष दुबे नरेंद्र राठौर, नरेन्द्र सोलंकी, दीपक पगारे, वूमेन इंपावरमेंट जिला संयोजक हर्षा शर्मा, ज्योत्सना चाकरे प्रज्ञा चाकरे, रीता चाकरे सहित अनेक साधक उपस्थित रहे।
साधकों ने आंतरिक शांति और आत्मिक अनुभव के लिए सोहम ध्यान विधि का सामूहिक अभ्यास किया, जिससे वातावरण में अद्भुत ऊर्जा और शांति का अनुभव हुआ। उत्सव के पश्चात स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में सभी संतों, परम गुरु ओशो, समर्थ गुरुदेव एवं स्थानीय संतों के विशेष आशीर्वाद के लिए साधकों ने हृदय से धन्यवाद, आभार एवं अहोभाव प्रकट किया।









