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कहानी वाचिक परम्परा की मूल विधा है, ,,कैलाश मंडलेकर,,

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कहानी वाचिक परम्परा की मूल विधा है, ,,कैलाश मंडलेकर,,

मंडलेकर की कहानियों की समीक्षा एवं संवाद कार्यक्रम संपन्न।

खंडवा। कहानी के विभिन्न आयामों और रचनाकर्म पर बोलते हुए सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार कैलाश मंडलेकर ने कहा कहानी को बांग्ला में गल्प कहते हैं, जो गप्प का पर्याय है। कहानी मूलतः समूह में की गई मन बहलाव की बातों से उपजी विधा है। सी वी रामन विद्यालय के कुलसचिव डॉ अरुण रमेश जोशी ने कहानी में व्यंग्य और कथा तत्वों की चर्चा की। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि वनमाली सृजन पीठ खंडवा के समीक्षा एवं संवाद कार्यक्रम में कैलाश मण्डलेकर के कहानी संग्रह दस कहानियों पर अरुण सातले, शैलेंद्र शरण,श्याम सुंदर तिवारी, सुधीर देशपांडे और राजश्री शर्मा ने अपने विचार रखे। वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि शीघ्र ही कहानी विधा पर एक सृजन शिविर विद्यार्थियों एवं युवा रचनाकारों के लिए आयोजित किया जा रहा है। स्वागत उदबोधन रवि चतुर्वेदी एवं आभार श्याम सुंदर तिवारी ने व्यक्त किया। संयोजन गीतिका चतुर्वेदी का था।इस अवसर पर शहजाद कुरैशी,शरद जैन, गोविंद गुंजन,रघुवीर शर्मा,संचित चौकड़े,राघव गीते,विश्वास सोनी, रश्मि दुधे,आनंद जैन, अनिल बाहेती सुनील जैन, ज्योति चतुर्वेदी,मनोज जोशी,मीरा व्यास एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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