मध्यप्रदेश

झाबुआ नगर में ऐतिहासिक संयोग: 19 वर्षों बाद एक ही तिथि पर दादावाड़ी में भव्य ध्वजारोहण, विशाल धर्मसभा का हुआ आयोजन

रिपोर्टर – भव्य जैन

झाबुआ नगर में आचार्य पूज्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंत सेन सूरीश्वर जी द्वारा पौष सुदी तेरस, एक जनवरी 2007 को मध्यप्रदेश के एकमात्र श्री पुण्डरीक स्वामी गणधर मंदिर की प्रतिष्ठा दादावाड़ी में की गई थी। ऐतिहासिक संयोगवश ठीक 19 वर्षों बाद वही तिथि और तारीख पुनः एक साथ आने पर गुरुवार को साध्वी रत्न रेखा जी की निश्रा में वार्षिक ध्वजारोहण विशेष धार्मिक आयोजनों के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बावन जिनालय के पौषध भवन में विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य भगवंत महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि कोमल कुमार जी ने सत्प्रवृत्ति एवं दुष्प्रवृत्ति पर प्रेरक प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि आत्मा स्वयं अपने कर्मों की कर्ता और भोक्ता है। जब व्यक्ति यह समझ लेता है कि क्या करना है और क्या नहीं, तब वह कभी पापमय प्रवृत्ति की ओर अग्रसर नहीं होता। मुनि श्री ने आठ आत्माओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कषाय आत्मा यदि नियंत्रण में न हो तो कितना ही धर्म-ध्यान क्यों न किया जाए, सब व्यर्थ हो जाता है। संयम को उन्होंने आत्मा की कोठी की चाबी बताते हुए कहा कि शुभ आत्मा से ही कर्मों की निर्जरा संभव है। नववर्ष 2026 के अवसर पर कषाय आत्मा पर चिंतन कर शुभ योग और शुभ चिंतन द्वारा आत्मकल्याण का मार्ग अपनाने का संदेश दिया।

मुनि कोमल कुमार जी ने झाबुआ शहर में स्थानकवासी, मंदिरमार्गीय एवं तेरापंथ समाज की एकता और संगठन की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय बताया। इसके पश्चात साध्वी अनुभव दृष्टा जी ने प्रवचन में कहा कि तीर्थ हमें संसार सागर से पार लगाने के लिए होते हैं। यह अवसर 24 तीर्थंकरों एवं 1452 गणधर भगवंतों के स्मरण का पावन अवसर है। उन्होंने बच्चों में शुभ संस्कार विकसित करने हेतु धार्मिक क्रियाओं से जोड़ने पर बल दिया तथा आगामी पूर्णिमा पर आयंबिल करने की प्रेरणा दी।

24 ध्वजाएं एक साथ मंत्रोच्चार के साथ चढ़ाई गईं

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 7 बजे सत्तर भेदी पूजन लाभार्थी निर्मल मेहता परिवार द्वारा सम्पन्न हुआ, जिसकी विधि ओएल जैन ने करवाई। इसके पश्चात सभी ध्वजाओं पर जल, चंदन, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य एवं फल से अष्टप्रकारी पूजन किया गया। मुख्य ध्वजा प्रतीक मेहता परिवार द्वारा विशिष्ट मंत्रोच्चार के साथ चढ़ाई गई, वहीं 24 ध्वजाएं एक साथ लाभार्थी परिवारों द्वारा चढ़ाई गईं। आरती मेहता परिवार ने की। कार्यक्रम के पश्चात भाता की प्रभावना हुई।

इस अवसर पर विधिकारक ओएल जैन सहित नवकारसी के मुख्य लाभार्थी निर्मल मेहता का बहुमान वरिष्ठ श्रावक धर्मचंद्र मेहता, अशोक कटारिया, श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता, मीडिया प्रभारी रिंकू रुनवाल, तेज प्रकाश कोठारी, ज्ञानचंद मेहता, मुकेश रुनवाल, दीपक संघवी, भारत बाबेल, अशोक राठौड़ द्वारा किया गया।

साध्वी रत्न रेखा जी की प्रेरणा से छोटे आदिनाथ भगवान को सोने एवं चांदी से निर्मित हार अर्पण किया गया। इस पावन अवसर पर रचित कटारिया, निशांत शाह, जितेंद्र वरमेचा, राजेश मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

यह आयोजन श्रद्धा, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम उदाहरण बना।

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