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गेंदे की खुशबू से महका जीवन 68 साल के पर्यावरण प्रेमी अरुण सेठी का जुनून जिसने बना दिया उनका घर “खुशबू का बगीचा

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*एडिटर/संपादक:-तनीश गुप्ता,खण्डवा✍️

गेंदे की खुशबू से महका जीवन 68 साल के पर्यावरण प्रेमी अरुण सेठी का जुनून जिसने बना दिया उनका घर “खुशबू का बगीचा

खंडवा। पर्यावरण की रक्षा के लिए शासन प्रशासन के साथ ही धरती पर प्रकृति से प्यार करने वालों की कमी नहीं, लेकिन पर्यावरण प्रेमी 68 वर्षीय अरुण सेठी ने इस प्रेम को एक नई पहचान दी है। जहां लोग रिटायरमेंट के बाद आराम का जीवन चुनते हैं, वहीं अरुण सेठी ने अपनी ज़िंदगी को फूलों की खुशबू में ढाल दिया है। समाजसेवी सुनील जैन भाई अरुण सेठी को बधाई एवं शुभकामना देते हुए बताया कि अरुण भाई सेठी का घर, उनकी छत और आंगन – सब गेंदे के फूलों की विविध खुशबू से गुलज़ार हैं।

फूलों से जन्मा जुनून

अरुण सेठी को बचपन से ही प्रकृति और पौधों से लगाव था। जब बाकी बच्चे क्रिकेट खेलते थे, तब वे अपनी दादी के साथ बगीचे में पानी डालते और पौधों से बातें करते थे। यही बचपन का शौक धीरे-धीरे एक गहरी रुचि में बदल गया। आज उनकी छत पर गेंदे की 2 से अधिक हाइब्रिड वैरायटी खिलती हैं – पीले, नारंगी, सफेद और सुनहरे रंगों में दमकते ये फूल जैसे उनकी मेहनत का प्रतीक हैं।

सुबह 4 बजे की शुरुआत

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि अरुण सेठी की दिनचर्या सुनकर युवा भी हैरान रह जाते हैं। वे रोज़ सुबह 4 बजे उठते हैं, हल्का व्यायाम करने के बाद सीधे अपने बगीचे में पहुँच जाते हैं। हर पौधे से बात करते हुए, उसकी पत्तियों पर हाथ फेरते हुए जैसे वे उसे जीवन का आशीर्वाद दे रहे हों। यही वजह है कि उनके बगीचे में हर फूल मानो मुस्कुराता है।

खुद बनाते हैं बीज, मुफ्त में देते हैं पौधे

सेठी जी अपने बगीचे के लिए बीज खुद तैयार करते हैं। उनका मानना है कि “पौधों को पालना बच्चों को पालने जैसा है, प्यार से बड़ा कोई खाद नहीं।” उन्होंने अपने गार्डन से कई पौधे तैयार कर आसपास के लोगों को मुफ्त में उपहार में दिए हैं। वे कहते हैं, “अगर हर घर में एक पौधा लग जाए, तो हवा भी मुस्कुराएगी।”

बगीचा बना प्रेरणा का केंद्र

खंडवा के कई लोग अब उनकी प्रेरणा से बागवानी अपनाने लगे हैं। अरुण सेठी का घर अब सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि “प्रकृति की पाठशाला” बन गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी उनके गार्डन को देखने आते हैं। खास बात यह है कि गेंदे के पौधे यहाँ 3 से 4 फीट तक की ऊँचाई तक पहुँच जाते हैं, जो सामान्य गेंदे की पौध से कहीं ज्यादा है।

सम्मान और पहचान

उनकी मेहनत और समर्पण को देखकर स्थानीय प्रशासन ने उन्हें “सर्वश्रेष्ठ बगीचा पुरस्कार” से सम्मानित किया। यह पुरस्कार सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की लगन का प्रमाण है। अरुण जी बताते हैं कि “जब कोई मेरा बगीचा देखकर मुस्कुराता है, वही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”

बिजनेस और बागवानी – दोनों में संतुलन

अरुण सेठी न सिर्फ एक सफल प्रकृति प्रेमी हैं, बल्कि एक कामयाब बिजनेस मैन भी हैं। उनका कारोबार खंडवा, बुरहानपुर, हरदा और आसपास के जिलों में फैला है। व्यस्त व्यापारिक जीवन के बावजूद वे हर दिन पौधों के लिए समय निकालते हैं। उनके अनुसार, “काम से पैसा मिलता है, लेकिन पौधों से सुकून।”

भविष्य की योजना – फूलों से सजे शहर का सपना

अब उनका सपना है कि खंडवा का हर घर किसी न किसी फूल की खुशबू से महके। इसके लिए उन्होंने “हर घर गार्डन” मुहिम शुरू की है, जिसके तहत वे लोगों को मुफ्त बीज और पौध तैयार करने की ट्रेनिंग देते हैं।

अंतिम संदेश

सुनील जैन ने बताया कि अरुण सेठी की कहानी यह सिखाती है कि उम्र चाहे कोई भी हो, जुनून अगर सच्चा हो तो वह हर दिन नया जीवन दे सकता है। 68 की उम्र में भी उनका जोश 21 साल के युवक जैसा है। उनके शब्दों में —
“फूलों से दोस्ती कीजिए, ये कभी शिकायत नहीं करते, बस खुशबू बाँटते रहते हैं।”

आज उनका बगीचा सिर्फ फूलों से नहीं, बल्कि इंसानियत और प्रेरणा की खुशबू से भी महकता है — जो हर आने-जाने वाले को एक संदेश देती है कि प्रकृति से प्यार ही सच्चा सुख है।

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