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तपस्या और आत्म शुद्धि के दस धर्मों के पर्युषण पर्व का धार्मिक उल्लास के साथ हुआ समापन।

पर्व समापन पर निकली शोभायात्रा, मुनि श्री के प्रवचन के साथ भगवान का हुआ अभिषेक व शांतिधारा।

तपस्या और आत्म शुद्धि के दस धर्मों के पर्युषण पर्व का धार्मिक उल्लास के साथ हुआ समापन।

पर्व समापन पर निकली शोभायात्रा, मुनि श्री के प्रवचन के साथ भगवान का हुआ अभिषेक व शांतिधारा।

क्षमावाणी महोत्सव 8 को मनाया जाएगा निकलेगी शोभायात्रा।

खंडवा। जिस प्रकार मंदिर बनाने के बाद स्वर्ण कलश चढ़ाते हैं, उसी प्रकार यह ब्रह्मचर्य धर्म पर चढ़ा हुआ स्वर्ण कलश है। पांच इंद्रियों को वशीभूत करके निरस्त करके, उनको अपने में समेटकर जो केवल अपनी शुद्ध आत्मा स्वरूप में ही रमण करता है, क्षण भर के लिए भी जिसकी दृष्टि बाहर नहीं है, वह आचरण ही ब्रह्मचर्य है। जो शील का 18 हजार अतिचार रहित पालन करते हैं, वस्तुत: वहीं ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करते हैं। व्यवहारिक दृष्टि से शारीरिक संयम का पालन करना, कामविकार को जीतना ब्रह्मचर्य व्रत है। यह उद्गार पर्युषण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन देते हुए उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि विगत नौ दिनों से हम पर्व को धार्मिक उल्लास के साथ संयम और त्याग के रूप में मना रहे हैं। हमारा धर्म और संस्कृति हमें यह नहीं कहता कि हम सिर्फ दस दिन ही पर्व के दौरान परमात्मा की आराधना करें बल्कि अपनी नियमित दिनचर्या में आत्म साधना के लिए परमात्मा की शरण में अवश्य जाएं। यह धर्म के दस भेद पाप कर्म का नाश करने वाले और पुण्य का प्रादुर्भाव करने वाले हैं। संसार में धर्म की आराधना श्रेष्ठ है, धर्म की आराधना से ही व्यक्ति जीवन सुखी समृद्ध और लोक मंगल होता है। मुनिश्री ने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम व सीता चौदह वर्ष तक यौवनावस्था में संयम से रहे। अपने शरीर से ऊपर उठने की कला का नाम ब्रह्मचर्य है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि पर्व के समापन पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सराफा से शोभायात्रा दोपहर 3:00 बजे निकली मोघट रोड आदिनाथ जैन मंदिर, घासपुरा महावीर दिगंबर जैन मंदिर पहुंची मुनि श्री ने प्रवचन में कहा कि बड़े ही पुण्य कर्मों से हमें मानव गति प्राप्त हुई है इसका सदुपयोग करें सिर्फ दस दिन नहीं प्रतिदिन देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पण की भावना बनाए रखें हमारे जीवन का कल्याण होगा। तुम्हारे जीवन में सुख शांति बनी रहेगी। प्रवचन के पश्चात मंदिर में भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा सचिन गदिया परिवार द्वारा की गई। माला पहनने का सौभाग्य डॉ प्रांजील जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पूजा नीता अमर लोहाडिया द्वारा कराई गई। । समाज के सचिव सुनील जैन बताया कि हर्ष का विषय है कि चातुर्मास के साथ ही पर्व पर उपाध्याय श्री विश्रुत सागर एवं निर्वेद सागर जी महाराज का सानिध्य हम सबको प्राप्त हुआ और सभी सामाजिक बंधुओं ने पर्व के दौरान धर्म साधना करते हुए पुण्य लाभ की ओर अग्रसर हुए। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि अनंत चौदस के शुभ अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सराफा में मुनि संघ के सानिध्य में पंडित निखलेश जैन के संयोजन में श्री जी की शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रीमान दिलीप कुमार आयुष कुमार पाटोदी परिवार,निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य श्रीमान संतोष कुमार ,गौरव कुमार,सौरभ कुमार जैन परिवार एवं श्रीजी की महाआरती करने का सौभाग्य डॉ दीपिका,कुमारी महिमा एवं दिव्या पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शांतिधारा करने का सौभाग्य नीरज कुमार जैन बेनाडा प्रकाश चंद जी बड़जात्या, पीयूष कुमार जी लोहाडिया परिवार को प्राप्त हुआ एवं लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सुदीप ,पवन कुमार रावका परिवार को प्राप्त हुआ। धर्मशाला में अंतिम दिन पूजा में शांति धारा आरती करने का सौभाग्य सुनील काला परिवार एवं श्री जी की माला पहनने का सौभाग्य संजलि जितेंद्र स्वानुभूति जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर पोरवाड़ समाज अध्यक्ष वीरेंद्र भटयांण,दिनेश जैन,देवेंद्र सराफ,विजय सेठी,सुनील जैन,प्रेमांशु चौधरी,पुष्पेंद्र जैन,कांतिलाल जैन,कैलाश पहाड़िया,संदीप छाबड़ा,डॉ प्रांजील जैन,रविन्द्र जैन महल,मुकेश जैन,पंकज जैन महल,अविनाश जैन, पंकज छाबड़ा ,राजेंद्र छाबड़ा, सुधांशु चौधरी,अंकित जैन,नीरज बैनाड़ा,कैलाशचंद जैन,माणकचंद जैन ,सुभाष सेठी सहित समाजजन मौजूद थे।

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