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दानी व्यक्ति दरिद्र नहीं होता, त्याग धर्म है और दान पुण्य है, “विश्रुत सागर महाराज”

पर्युषण पर्व के समापन पर 6 सितंबर को निकलेगी शोभायात्रा।

दानी व्यक्ति दरिद्र नहीं होता, त्याग धर्म है और दान पुण्य है, “विश्रुत सागर महाराज”

पर्युषण पर्व के समापन पर 6 सितंबर को निकलेगी शोभायात्रा।

मुनि संघ के सानिध्य में क्षमा वाणी महोत्सव 8 सितंबर को मनाया जाएगा।

खंडवा। धन के संचय करने में दुख उसकी रक्षा करने में कष्ट और उसके खर्च करने में बड़ी पीड़ा होती है। इन सब बातों से मनुष्य अशुभ कर्म बंद करता है। इस पाप से छुटने का केवल एक ही उपाय है, धर्म साधर, धर्म प्रचार, दीन दुखियों की सेवा, लोकहित, सामाजिक दायित्व, परोपकार में उस धन को खुले हाथ से दान किया जाए। पात्र दान में, करूणा दान, समाज उन्नति में आवश्यकता अनुसार खर्च किया जाए। परमात्मा ने यदि हमें दिया है तो त्याग की भावना भी हमारे मन में होना चाहिए यही पुण्य है। दान देने वाला कभी गरीब दरिद्र नहीं होता, उसका भंडार सदा भरपूर रहता है इस कारण अपनी शक्ति के अनुसार प्रत्येक मानव ने कुछ न कुछ दान अवश्य करते रहना चाहिए पता नहीं कब आयु समाप्त हो जाए। त्याग धर्म और दस धर्म मात्र एक या दस दिनों या चौमासे का धर्म नहीं है यह आचरण में जीवनपर्यंत ही नहीं वरन् भवांतर में उतारा जाने वाला धर्म है। संस्कार नींव से ही जीवन में उतारे जाने की आवश्यकता है। यह उद्गार उपाध्यक्ष विश्रुत सागरजी महाराज ने अपने प्रात:काल प्रवचन में व्यक्त किए। पर्युषण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म पर अपने प्रवचन देते हुए मुनिश्री ने कहा कि त्याग धर्म की जब भी चर्चा चलती है तब-तब उसका संबंध दान से जोड़ लिया जाता है। त्याग और दान में बहुत अंतर है। त्याग धर्म है और दान पुण्य है। दान स्वयं की वस्तु से किया जाता है किंतु त्याग पर वस्तु का भी होता है। दानी को राजा और त्यागी को महाराज कहा जाता है। दीन, दुखी, अनाथ, विधवा, साधर्मी भाई-बहन की गुप्त सहायता करते रहना गृहस्थ का सबसे बड़ा धर्म है। गुप्तदान का फल बहुत मिलता है इससे न तो लेने वाले को संकोच होता है और न देने वाले को अभिमान होता है। दुर्गति से बचने के लिए त्याग धर्म के पालन हेतु दान का अवलंबन आवश्यक है। सभी के जीवन में त्याग धर्म का अवतरण हो। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान गुरुवार प्रात: 6 बजे ध्यान शिविर तत्पश्चात सामूहिक अभिषेक धारा एवं पूजन किये गये। पर्युषण पर्व के दौरान मुनिसंघ के सानिध्य में दो, तीन और पांच उपवास के साथ कई दस उपवास की ओर अग्रसर है जिसमें युवा वर्ग भी शामिल है तपस्वी तरुण गंगवाल, अतुल जैन,अर्पित जैन,अपूर्व,अर्पण बैनाड़ा, महिमा, दीपिका पहाड़िया गीतांश,गुलिशा भरत छाबड़ा स्वाति भूपेश जैन,अनामिका तपिश जैन,दीपक सेठी,नीति हेमंत गोधा का तप उपवास के रूप में तीन,पांच, आठवें दिन सफलता एवं पूर्ण शक्ति एवं धर्म साधना के साथ जारी रहा। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया की पर्युषण पर्व का समापन 6 सितंबर अनंत चतुदर्शी के दिन होगा। इस अवसर पर शोभायात्रा दोपहर 3 बजे सराफा पार्श्वनाथ जैन मंदिर से निकलेगी जो रामगंज, बुधवारा, बांबे बाजार, घंटाघर होकर बजरंग चौक से घासपुरा महावीर जैन मंदिर पहुंचेगी जहां भगवान के अभिषेक के पश्चात यह शोभायात्रा सराफा होते हुए जैन धर्मशाला पहुंचेगी जहां मुनिसंघ के सानिध्य में प्रवचनों के साथ भगवान का अभिषेक व शांतिधारा के पश्चात पर्व का समापन होगा। 8 सितंबर को क्षमावाणी महोत्सव घासपुरा महावीर जैन मंदिर परिसर में मुनिसंघ के सानिध्य में होगा जहां तपस्वियों का सम्मान भी किया जाएगा।

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