
आत्म संयम के बिना मुक्ति नहीं क्रोध कषायों को रोक देना ही संयम है, “विश्रुत सागर महाराज”
धूम दशमी पर पूजा अर्चना कर समाजजनों ने मंदिरों में जाकर किया धूप का खेवन।

खंडवा। अपने आप पर नियंत्रण करना ही सबसे बड़ा संयम है, अपने आप पर नियंत्रित किए बिना आत्म संयम नहीं होता और आत्म संयम के बिना हम मुक्त नहीं हो सकते। संयम पद में दो शब्द हैं एक सम दूसरा यम। सम शब्द का अर्थ है सम्यक प्रकार यम शब्द का अर्थ है दमन करना अर्थात दबाना। सम्यक प्रकार दबा देना आकुलता व्याकुलता को जो कि विषय भागों के दृढ़ संस्कार वश या कर्त्तव्य विहीनता वश प्रति क्षण नवीन रूप धारण करके हमारे अंत:करण में प्रवेश पाते हैं। क्रोधादि कषायों को रोक देना भी संयम है। हिंसादि पापों से अपने को रोकना भी संयम है। कोई भी आदमी मुक्त नहीं है, जो अपने आपका स्वामी नहीं है। अर्थात जिसने विकारी भावों को नहीं जीता है, अपने गुण रत्नों का स्वामी नहीं बना है वह आत्मसंयम नहीं पाल सकता। बिना इंद्रिय संयम के प्राणी संयम नहीं हो सकता। यह उद्गार पर्युषण पर्व के छटवें दिन उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए उपाध्याय विश्रुत सागरजी महाराज ने व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि संयम का बंधन है स्वतंत्रता के लिए। अगर आप संसार से स्वतंत्र होना चाहते हैं तो संयम के बंधन में तो बंधना ही होगा, यह ऐसा बंधन है जो मनुष्य को स्वच्छंदता से बचाता है। आज सारा संसार इंद्रियों का दास बना हुआ है, बड़े-बड़े बलवान योद्धा और विचारशील विद्वान भी इंद्रियों के गुलाम बने हुए हैं और अपना अधिकतर समय इंद्रियों को तृप्त करने में लगाया करते हैं। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म में पर्युषण पर्व को महान पर्व मानकर सभी श्रद्धालु दस दिनों तक अपनी क्षमता के अनुसार जहां उपवास रखते हैं वहीं एकासना के साथ दस धर्म की पूजा अर्चना एवं मुनिसंघ के प्रवचनों का लाभ उत्साह से उठा रहे हैं। समाज के अलग-अलग मंडलों द्वारा पर्व के दौरान मंदिरों में धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन चल रहा है। पर्व के दौरान मंगलवार को धूप दशमी का पर्व मनाया गया। सभी सामाजिक बंधुओं ने परिवार सहित शाम 4 से 6 बजे तक सराफा स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर, घासपुरा महावीर जैन मंदिर, पड़ावा स्थित कहान आदिनाथ जैन मंदिर, सेठी नगर में चंद्रप्रभु जैन मंदिर, मोघट रोड स्थित आदिनाथ जैन मंदिर एवं नवनिर्मित नवकार नगर में मुनिसुव्रत जैन मंदिर में पहुंचकर अपने पापो के नाश कर्म के लिए धूप का खेवन किया एवं दर्शन कर पूजा अर्चना की। धार्मिक उल्लास के साथ धूप दशमी का यह पर्व मनाया गया। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पर्व का समापन अनंत चतुर्दशी को होगा इस अवसर पर शहर के प्रमुख मार्गो से शोभायात्रा निकाली जाएगी एवं उत्तम क्षमा धर्म से शुरू हुए इस पर्व का समापन क्षमावाणी महोत्सव पर होगा। मुनि संघ के साहित्य में प्रातः काल क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा इस अवसर पर पर्युषण पर्व के दौरान उपवास करने वाले त्यागियों का सम्मान भी किया जाएगा। उत्तम संयम धर्म के प्रवचन के दौरान समाज के विरेन्द्र भट्याण, विजय सेठी, अविनाश जैन,पंकज जैन महल, कैलाश पहाड़िया अर्पित भैया ,सुनील जैन ,प्रेमांशु चौधरी, दीपक सेठी, सुनील काला, प्रवीण सेठी, कांतिलाल जैन सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।










