ताज़ा ख़बरें

“महुआ नगरी – जहाँ शराब बहती है नालियों से भी तेज़!”

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की तहसील खैरलांजी और आसपास के गाँवों में इन दिनों हालत ऐसे हैं जैसे महुआ की गंगा बह रही हो। हर गली, हर नुक्कड़ पर मानो “शराब का सेल-फेस्टिवल” लगा हो।
गाँवों के लोग दूध वाले से ज़्यादा कच्ची महुआ वाले का इंतज़ार करते हैं। फर्क बस इतना है कि दूध वाला “टोन मिल्क” लाता है और ये लोग “फुल टोन महुआ” बेचते हैं।
शाम होते ही नज़ारा कुछ यूँ होता है –
चाय की दुकान पर अब कटोरी चाय की जगह कटोरी महुआ मिलती है।
सड़क पर लोग पैदल कम, झूमते-गिरते ज़्यादा दिखते हैं।
बच्चें कहते हैं – “पापा आइसक्रीम ला दो”, पापा कहते हैं – “पहले ठेके से महुआ ले लूँ।”
पुलिस और आबकारी विभाग की हालत भी मजेदार है। छोटे-छोटे बेचारे “नन्हें शराब बेचू” को पकड़कर ऐसे प्रेस नोट बनाते हैं जैसे “मोस्ट वांटेड डॉन” पकड़ लिया हो।
और बड़े-बड़े शराब माफिया? उन्हें तो मानो VIP सिक्योरिटी मिली हो – “भाई साहब आराम से बेचना, हम तो आपकी ब्रांडिंग कर रहे हैं।”
💸 गाँववालों का कहना है – “पुलिस प्रभारी साहब हर महीने ‘महुआ टैक्स’ वसूलते हैं, ताकि ये महुआ-इकॉनमी बराबर चलती रहे।”अब हालत ये है कि खैरलांजी, भोरगढ़ , टेमनी किन्हीं ग्राम टीजू टेकाडी , शंकर पिपरिया, भंडारबोडी ,आसपास के गाँवों में “सड़क, नाली और नदियाँ” तीनों में से सबसे तेज़ महुआ शराब बह रही है।
अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में बालाघाट का नाम बदलकर रखा जाएगा – “महुआघाट”।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!