
एडिटर/संपादक/तनीश गुप्ता,खण्डवा
जिले में विशेष टीकाकरण अभियान के तहत लगाए जा रहे टीके
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टीकाकरण बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है
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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओ.पी. जुगतावत के मार्गदर्शन में खसरा दिवस के अवसर पर 17 से 22 मार्च तक विशेष टीकाकरण सत्र लगाकर जिले में एम.आर. टीके से छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिल तंतवार ने बताया कि सोमवार को शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सूचीबद्ध करें हुए, छूटे व अन्यत्र स्थान चले गये बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसमें मजील्स, रुबेला के साथ ही अन्य टीके से छूटे हुए बच्चों का भी टीकाकरण किया जा रहा है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. तंतवार ने बताया कि टीकाकरण बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। मीजल्स एक गंभीर बीमारी है। खांसने छींकने से बीमारी एक बच्चे से दूसरे बच्चे में फैलती है। बच्चे को निमोनिया, दस्त, दिमागी संक्रमण जैसी घातक जटिलताओं के प्रति संवेदनशील बना सकता है। बच्चे में बुखार, शरीर पर लाल दाने, नाक बहना, ऑख आना जैसे लक्षण से इसकी पहचान होती है। बीमारी संक्रमित बच्चे की खांसी के ड्रापलेट के माध्यम से फैलती है एवं इसके लक्षण 7 से 14 दिन में दिखाई देते हैं।
रुबेला से गर्भवती स्त्री के गर्भ में पल रहा बच्चा अंधा, बहरा, मंदबुद्धि, दिल में छेद जैसी विकृति के साथ पैदा हो सकता है। बच्चे की गर्भ में मृत्यु भी हो सकती है। अगर महिला को गर्भ के आरंभ में रुबेला संक्रमण होता है तो सीआरएस (जन्मजात रुबेला सिंड्रोम) विकसित हो सकता है। रुबेला संक्रमण को जर्मन मीजल्स के नाम से भी जाना जाता है। वायरस के संपर्क में आने के 2 से 3 दिन बाद चकत्ते आते हैं और ये 3 दिन तक रह सकते हैं। मीजल्स रुबेला का पहला टीका 9 से 12 माह की आयु में तथा दूसरा टीका 16 से 24 माह की आयु में लगाया जाता है।










