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“जिंदगी एक सफर है सुहाना…”— किशोर दा के गीत ने फिर दिल छुआ, फैन की आखिरी इच्छा बनी मिसाल।

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“जिंदगी एक सफर है सुहाना…”— किशोर दा के गीत ने फिर दिल छुआ, फैन की आखिरी इच्छा बनी मिसाल।

मंदसौर निवासी किशोर प्रेमी भरत भाई खरबंदा का अंतिम संस्कार खंडवा में हुआ अस्थि विसर्जन ओंकारेश्वर में।

खंडवा। “जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना…” — किशोर कुमार का यह अमर गीत एक बार फिर सजीव हो उठा, जब उनके एक दीवाने प्रशंसक की अंतिम इच्छा ने पूरे संगीत एवं किशोर प्रेमियों को भावुक कर दिया। किशोर प्रेरणामंच के प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि लहसुन के व्यापारी किशोर प्रेमी मंदसौर निवासी स्वर्गीय भरत भाई खंरबदा ने जीवनभर किशोर दा के गीतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा माना। खासकर 1971 में आई फिल्म अंदाज़ का यह गीत, जो जीवन की अनिश्चितता और सफर को दर्शाता है, उनके दिल के बेहद करीब था। यह गीत उस दौर में इतना लोकप्रिय हुआ कि सालाना संगीत सूची में भी शीर्ष पर रहा।
भरत भाई अक्सर अपने करीबियों से कहा करते थे कि “जिंदगी एक सफर है…” सिर्फ गीत नहीं, बल्कि जीने का तरीका है। शायद यही वजह रही कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा में भी इस सफर को किशोर दा की यादों से जोड़ दिया। सुनील जैन ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि मरणोपरांत मेरा अंतिम संस्कार खंडवा किशोर दा की जन्मभूमि एवं उनकी समाधि के समाधि के समीप हो उनके निधन के बाद जब परिजन उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने खंडवा पहुंचे, तो मुक्तिधाम में माहौल बेहद भावुक हो गया। हर कोई यही महसूस कर रहा था कि एक सच्चे फैन ने अपने प्रिय गायक के गीत को जीवन से मृत्यु तक जीकर दिखाया।
संगीत प्रेमियों का कहना है कि किशोर कुमार के गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन दर्शन भी देते हैं। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनके गाने हर पीढ़ी के दिल में बसे हुए हैं।
यह घटना सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस संगीत की ताकत का प्रमाण है, जो इंसान को जीवनभर और उसके बाद भी जोड़कर रखती है।
और अंत में वही पंक्ति गूंजती रही—जिंदगी एक सफर है सुहाना,, प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि स्वर्गीय भरत भाई खंरबदा जी मंदसोर ने अंतिम इच्छा जाहीर की थी कि मरने के बाद अंतिम संस्कार किशोर कुमार स्मारक खंडवा मुक्तिधाम परिसर मे हो, 16 अप्रैल को गंभीर बीमारी के चलते अरविंदो अस्पताल इंदौर मध्यप्रदेश में देहान्त हो गया, अंतिम यात्रा मंदसौर की जगह आपकी अंतिम इच्छा को देखते हुए खंडवा मुक्तिधाम लाई गई, जिसमें आपके मुंबई की मुंह बोली बहन नेहा बामने, मित्र योगेश सोनी, नरेश बलवानी , अशोक पारवानी , केवलराम तेजवानी , सतीश भंबोरै परतवाड़ा उपस्थित रहे, अंतिम क्रिया पं. गोपाल दास भारद्वाज जी द्वारा सम्पन्न कराई गई, मुखाग्नि योगेश सोनी ने दी। किशोर प्रेमी सुनील जैन ने बताया कि 26 अप्रैल को नरेश बलवानी , योगेश सोनी, सतीश अंभोरे परतवाडा, धरम पठारिया सीहोर एवं किशोर भक्त परिवार खंडवा के तत्वाधान मे स्वर्गीय खरबंदा जी की अस्थियों को तीर्थ नगरी ओमकारेश्वर में मां नर्मदा में विसर्जित किया गया। इस अवसर पर किशोर प्रेमी सतीश अंभोरे परतवाड़ा एवं योगेश बोरसे ने स्वर्गीय खरबंदा के लिए बाल मुंडन भी किये। किशोर दा से जुड़ी सभी संस्थाओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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