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कभी सब कुछ छूट गया, आज करोड़ों का साम्राज्य हरसूद से विस्थापन के बाद खंडवा में दो भाइयों ने रचा इतिहास,

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कभी सब कुछ छूट गया, आज करोड़ों का साम्राज्य हरसूद से विस्थापन के बाद खंडवा में दो भाइयों ने रचा इतिहास,

संघर्ष, मेहनत और हौसले से बनी सफलता की मिसाल।

खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद क्षेत्र से जुड़ी यह कहानी सिर्फ दो भाइयों की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और मेहनत की एक ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है।समाज सेवी सुनील जैन ने बताया की रितेश गोयल और योगेश गोयल, जिनका बचपन और जीवन का शुरुआती दौर आर्थिक तंगी और मुश्किल हालातों में बीता, आज निमाड़ के बड़े उद्योगपति और कॉलोनाइजर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। सुनील जैन ने बताया कभी ऐसा समय था जब एशिया का सबसे बड़ा विस्थापन हरसूद नगर एवं आसपास के कई गांव का हुआ। हरसूद क्षेत्र नर्मदा परियोजना के चलते डूब में आ गया और हजारों परिवारों की तरह इन दोनों भाइयों का भी सब कुछ छूट गया। घर, कारोबार, पहचान—सब पीछे छूट गया और उन्हें मजबूरी में खंडवा आकर नई जिंदगी शुरू करनी पड़ी। यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, जहां हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। रितेश गोयल बताते हैं कि उनका पुस्तैनी काम व्यापार का था और हरसूद में उनकी फैक्ट्री और कारोबार स्थापित था। लेकिन विस्थापन के बाद सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय अपने छोटे भाई योगेश गोयल के साथ मिलकर फिर से शुरुआत करने का फैसला लिया.शुरुआत छोटे स्तर से हुई। मंडी में काम किया, पुराने व्यापार को फिर से खड़ा करने की कोशिश की और धीरे-धीरे नए क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाए। गिट्टी और निर्माण से जुड़े कामों में हाथ आजमाया और अनुभव हासिल किया। इसके बाद दोनों भाइयों ने कॉलोनी डेवलपमेंट के क्षेत्र में कदम रखा। यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। मेहनत, ईमानदारी और दूरदृष्टि के दम पर उन्होंने एक-एक करके कई प्रोजेक्ट शुरू किए और आज निमाड़ क्षेत्र में उनके 14 से 15 बड़े कॉलोनी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आज उनकी पहचान सिर्फ एक सफल कारोबारी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे उद्यमी के रूप में है, जिन्होंने सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया। उनका लक्ष्य हमेशा से यही रहा कि वे खुद आगे बढ़ें और दूसरों को भी आगे बढ़ने का मौका दें. व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने समाज और धर्म के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है। छैगांव माखन स्थित दिव्य बालाजी नगर में वे 81 फीट ऊंची भगवान तिरुपति बालाजी की भव्य मूर्ति का निर्माण करवा रहे हैं, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बन सकती है.इतना ही नहीं, ओंकारेश्वर में केदारेश्वर धाम मंदिर निर्माण की योजना भी उनके द्वारा तैयार की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर ही धार्मिक सुविधाएं मिल सकें। इन धार्मिक परियोजनाओं के लिए ट्रस्ट बनाने की भी योजना है, ताकि भविष्य में इनका संचालन व्यवस्थित रूप से हो सके.शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। “एंजेल प्लेनेट स्कूल” के माध्यम से वे बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं। इस स्कूल के कई बच्चों ने जिला और प्रदेश स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर खंडवा का नाम रोशन किया है। रितेश गोयल बताते हैं कि जब वे खंडवा आए थे, तब उनके पास बहुत सीमित संसाधन थे। उसी में उन्होंने एक छोटा मकान खरीदा और वहीं से अपने नए जीवन की शुरुआत की। संघर्षों से भरे इस सफर में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
आज स्थिति यह है कि उनका “बालाजी ग्रुप” निमाड़ क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन चुका है। उनकी कॉलोनियों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और उनका कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका है। यह कहानी बताती है कि अगर इंसान के पास हिम्मत, मेहनत और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। हरसूद के विस्थापन से लेकर खंडवा में सफलता का यह सफर वास्तव में संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की एक कहानी है.

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