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हाईकोर्ट के आदेश से खत्म हुआ 15 साल का विवाद

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हाईकोर्ट के आदेश से खत्म हुआ 15 साल का विवाद

प्रशासनिक निगरानी में राठौर समाज ने चुनी नई कार्यकारिणी

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में शनिवार का दिन राठौर समाज के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। करीब डेढ़ दशक से चले आ रहे विवाद और संगठनात्मक ठहराव का अंत करते हुए ‘राठौर सकल पंच ट्रस्ट’ के चुनाव जिला प्रशासन की सख्त निगरानी में सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए। यह प्रक्रिया समाज के लिए केवल चुनाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के रूप में देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और गठन को लेकर वर्षों से विवाद बना हुआ था, जिसके चलते मामला न्यायालय में विचाराधीन था। इस दौरान समाज का एक बड़ा वर्ग निर्णय प्रक्रिया से दूर रहा। अंततः माननीय हाईकोर्ट ने रीट पिटीशन क्रमांक 3614 पर सुनवाई करते हुए पूर्व नियुक्तियों को निरस्त किया और एसडीएम को 60 दिनों के भीतर पारदर्शी चुनाव कराने के निर्देश दिए। इसी आदेश के पालन में प्रशासन ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।
शनिवार को स्थानीय एसएन कॉलेज परिसर में सुबह से ही मतदान को लेकर उत्साह का माहौल रहा। चुनाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए थे—मतदान केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची का सत्यापन और पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित की गई। ट्रस्ट के 13 पदों के लिए करीब 32 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 456 पंजीकृत मतदाताओं में से 272 ने अपने मताधिकार का उपयोग कर बदलाव के पक्ष में मतदान किया।
चुनाव का सबसे रोमांचक मोड़ उस समय आया जब दो पदों पर प्रत्याशियों को बराबर मत प्राप्त हुए। प्रशासन की उपस्थिति में लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से परिणाम घोषित किया गया। इसमें सुरेशचंद्र राठौर ने गोविंद प्रसाद राठौर को पराजित किया, जबकि महेश राठौर (एडवोकेट) ने कमलेश राठौर को हराकर जीत दर्ज की।
निर्वाचित सदस्य –
1. रमेश चंद्र राठौर
2. बद्री प्रसाद राठौर
3. सुरेश राठौर
4. महेश राठौर (एडवोकेट)
5. प्रमोद राठौर
6. दीपेंद्र राठौर
7. अशोक राठौर
8. राहुल राठौर
9. दीपक राठौर
10. संदीप राठौर
11. अमित राठौर
12. सुभाष राठौर
13 विजय राठौर
परिणाम घोषित होते ही परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच विजयी उम्मीदवारों का स्वागत किया गया। समाजजनों ने इसे एक नई शुरुआत बताते हुए उम्मीद जताई कि अब संगठन में पारदर्शिता और सहभागिता बढ़ेगी।
नई कार्यकारिणी के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां और जिम्मेदारियां हैं। लंबे समय से लंबित सामाजिक गतिविधियों को पुनः प्रारंभ करना, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की सहायता सुनिश्चित करना, तथा वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती जैसे आयोजनों को फिर से शुरू करना प्राथमिकता में रहेगा। साथ ही, भविष्य में नियमित और समयबद्ध चुनाव कराना भी एक अहम दायित्व होगा, ताकि संगठन में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहे।
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