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बिना चढ़ाई और मोड़ के ‘रॉकेट’ जैसा दौड़ेगा आपका वाहन!

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बिना चढ़ाई और मोड़ के ‘रॉकेट’ जैसा दौड़ेगा आपका वाहन!

हॉलीवुड फिल्मों जैसा सुंदर इंदौर-इच्छापुर मार्ग बनकर लगभग तैयार, मौतौं का खतरा 90 प्रतिशत टलेगा

खंडवा। अंतरराष्ट्रीय तकनीक से बन रहा इंदौर- इच्छापुर मार्ग विश्व स्तरीय सड़क निर्माण में नजीर बन रहा है। भेरूघाट टनल के साथ वायाडक्ट और बाईग्राम चोराल घाट पर तो लंबी सुरंग लगभग पूरी हो गई हैं।
आपका वाहन अब घुमावदार और ऊंची चढ़ाई पर हांपेगा नहीं, बल्कि समतल लक्ष्य लेकर पहाड़ियों को अंदर से चीरते हुए सीधा इंदौर या इच्छापुर की तरफ निकल जाएगा। दुर्घटनाएं, जाम, ईंधन के साथ समय की भी बचत होगी। सिंहस्थ -2028 के लिए उज्जैन, इंदौर ओंकारेश्वर और खंडवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निमाड़ की गेम चेंजर बनेगी सड़क
3 घंटे का यह रन-वे घटकर आधा रह जाएगा। गेम चेंजर इस मार्ग का निर्माण लगभग पूर्णता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। बस, कुछ हिस्सों को जोड़ना बाकी है। तेजाजी नगर से बलवाड़ा के बीच 33.40 किलोमीटर लंबे इस 4-लेन मार्ग का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल इस राजमार्ग के लिए लगातार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जल्द यह सड़क मार्ग पूर्ण करने का अनुरोध कर रहे हैं।

मोदी, गडकरी और ज्ञानेश्वर की तिकड़ी का कमाल

प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि नितिन गडकरी ने इंदौर खरगोन खंडवा बुरहानपुर जिले को एक बड़ी सौगात इस सड़क राज मार्ग के रूप में दी हें जिसके पूर्ण हो आने से क्षेत्र की जनता के साथ यात्रियों को समय की काफी बचत होगी। एक अच्छा सड़क मार्ग प्राप्त होगा। इंदौर इच्छापुर राजमार्ग मार्ग आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर निर्मित हो रहा है।
सुनील जैन ने बताया कि मुख्य आकर्षण तीन सुरंगें
ये सुरंगें भेरूघाट, बाईग्राम और चोरल घाट के खतरनाक मोड़ों और जोखिमों को पूरी तरह खत्म कर देंगी। NHAI के रीजनल ऑफिसर श्रवण कुमार सिंह के अनुसार, इस चुनौतीपूर्ण घाटी क्षेत्र में न्यू ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मेथड (NATM) और इलेक्ट्रॉनिक ब्लास्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

फिल्मी सड़क जैसा होगा नजारा

परियोजना के तहत 575 मीटर लंबी भेरूघाट टनल के साथ एक वायाडक्ट तैयार किया जा रहा है, जबकि बाईग्राम में 480 मीटर और चोरल घाट में 550 मीटर लंबी सुरंगों का निर्माण हो रहा है। कुल 1.8 किलोमीटर लंबी ये सुरंगें तीखे मोड़ों और ढाल वाले रास्तों को बायपास कर सफर को सीधा और सुरक्षित बनाएंगी।

इंदौर पहुंचने में तीन नहीं, डेढ़ घंटा लगेगा

वर्तमान में इंदौर से ओंकारेश्वर पहुंचने में लगने वाला तीन घंटे का समय इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद घटकर आधा रह जाएगा। यह मार्ग विशेष रूप से सिंहस्थ-2028 के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, जब करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच सुगम यात्रा कर सकेंगे।

मौत की चिंता दूर, ब्लैक स्पॉट हटेंगे
सुरक्षा और स्थानीय कनेक्टिविटी को मजबूती देने के लिए इस मार्ग पर व्यापक बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है, जिसमें एक मेजर ब्रिज, 14 माइनर ब्रिज, एक रेलवे ओवर ब्रिज, दो वायाडक्ट और 10 अंडरपास शामिल हैं। आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और क्रैश बैरियर के माध्यम से मार्ग के ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को स्थायी रूप से खत्म कर दिया जाएगा।

खंडवा को देश के इन हिस्सों से जोड़ेगा मार्ग

प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि चौरागढ़ यह परियोजना न केवल इंदौर-एदलाबाद कॉरिडोर का हिस्सा है, बल्कि इंदौर-हैदराबाद कॉरिडोर की भी एक अहम कड़ी है। इससे बुरहानपुर और महाराष्ट्र के जलगांव सहित दक्षिण भारत की ओर माल परिवहन तेज होगा, जिससे कृषि और औद्योगिक सामग्री की परिवहन लागत में भारी कमी आएगी।

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