

सिवनी/बरघाट – गरीबों को पक्की छत देने के उद्देश्य से चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना में रिश्वत का खेल सामने आने से एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर हुई है। बरघाट जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत साले में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पदस्थ रोजगार सहायक ओमेंद्र परिधि को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, रोजगार सहायक ओमेंद्र परिधि पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्त जारी करने के एवज में ग्राम पंचायत के उप सरपंच वहाब खान एवं एक हितग्राही से कुल 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
योजना से जुड़ा हितग्राही लंबे समय से किश्त के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता रहा। रिश्वत की मांग से मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर उप सरपंच वहाब खान ने पूरे मामले की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में दर्ज कराई।
शिकायत की सत्यता की पुष्टि के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार जैसे ही आरोपी रोजगार सहायक ने रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 5,000 रुपये स्वीकार किए, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
कार्रवाई के दौरान टीम ने रिश्वत की रकम बरामद की और आवश्यक पंचनामा तैयार किया।इसके बाद आरोपी को लेकर लोकायुक्त टीम बरघाट स्थित रेस्ट हाउस पहुंची, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई से पूरे जनपद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी कार्रवाई पहले होती, तो गरीबों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ती।
यह मामला साबित करता है कि “गरीब के घर पर सौदा” सिर्फ एक हेडलाइन नहीं, बल्कि उस सच की तस्वीर है, जहां छोटी सी रिश्वत भी बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कह देती है।













