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घंसौर का अस्पताल वेंटिलेटर पर, जनता सड़कों पर — क्या जनप्रतिनिधि सिर्फ वोट तक सीमित हैं

घंसौर विकासखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है।
सरकारी अस्पताल की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय लोग इसे “वेंटिलेटर पर पड़ा सिस्टम” कह रहे हैं। डॉक्टरों की भारी कमी, आवश्यक दवाइयों का अभाव, जांच सुविधाओं की बदहाली और आपात सेवाओं में लापरवाही ने आम जनता को असहाय बना दिया है।
इसी हालात के विरोध में आज घंसौर में अभूतपूर्व जनआक्रोश देखने को मिला। व्यापारी, छोटे दुकानदार और आम नागरिकों ने एकजुट होकर अपनी दुकानें बंद रखीं और बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन केवल अस्पताल की अव्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उस राजनीतिक उदासीनता के विरुद्ध था, जिसने जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
जनसमूह ने घंसौर एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए सात दिनों के भीतर ठोस सुधार की मांग की। ज्ञापन में डॉक्टरों की नियमित पदस्थापना, दवाइयों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं की बहाली और आपात सेवाओं को दुरुस्त करने की प्रमुख मांगें शामिल रहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्षेत्र के सांसद और विधायक इस संकट पर मौन क्यों हैं? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जनआक्रोश बड़े आंदोलन में बदल सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन–प्रशासन की होगी।

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