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नालंदा (बिहार) से खंडवा तक — प्रवीण शर्मा ने नाबालिग बच्चों को दिखाई सही राह।

भावनाओं से नहीं, जिम्मेदारी से निर्णय लेने की दी प्रेरणा।

नालंदा (बिहार) से खंडवा तक — प्रवीण शर्मा ने नाबालिग बच्चों को दिखाई सही राह।

भावनाओं से नहीं, जिम्मेदारी से निर्णय लेने की दी प्रेरणा।

खंडवा। बिहार की प्रसिद्ध शिक्षा नगरी नालंदा (बिहार) के दो नाबालिग छात्र-छात्रा, जो विवाह करने के उद्देश्य से इंदौर के लिए घर से निकले थे, गलत ट्रेन में बैठ जाने से खंडवा पहुँच गए। नाबालिग बालक कक्षा 10वीं और नाबालिग बालिका कक्षा 11वीं की छात्रा हैं।
खंडवा पहुँचने के बाद बालक ने अद्भुत समझदारी का परिचय देते हुए स्वयं आगे बढ़कर जीआरपी थाना खंडवा पहुँचकर खुद को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इस जिम्मेदारीपूर्ण कदम की सराहना करते हुए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा ने दोनों को अपने संरक्षण में लिया और मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए तुरंत काउंसलिंग करवाई। समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में की गई काउंसलिंग में बच्चों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सही निर्णय के महत्व को समझाया गया। दोनों ने समिति के समक्ष कहा कि वे बालिग होने के बाद ही विवाह करेंगे, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सके। प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति का यह कदम अत्यंत सराहनीय रहा। अध्यक्ष शर्मा ने बच्चों को प्रेमपूर्वक समझाकर सही दिशा में प्रेरित किया। उनके साथ समिति के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल और स्वप्निल जैन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। काउंसलिंग के बाद दोनों नाबालिगों को उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। इस घटना ने समाज को यह सिखाया कि “सच्ची समझदारी वही है, जो भावनाओं से नहीं, जिम्मेदारी से निर्णय ले।

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