ताज़ा ख़बरें

श्री विठ्ठल मंदिर में महालक्ष्मी के रूप में कनिष्ठा और ज्येष्ठा का हुआ आगमन।

31 अगस्त रविवार से लेकर 2 सितंबर मंगलवार तक होगी महालक्ष्मी माता की पूजा।

श्री विठ्ठल मंदिर में महालक्ष्मी के रूप में कनिष्ठा और ज्येष्ठा का हुआ आगमन।

31 अगस्त रविवार से लेकर 2 सितंबर मंगलवार तक होगी महालक्ष्मी माता की पूजा।

विट्ठल मंदिर में रविवार को मुहूर्त अनुसार महालक्ष्मी का आगमन हुआ।

सोमवार को पूजन होगा एवम
मंगलवार को सायंकाल में भावपूर्ण विसर्जन होगा।।

खंडवा। अनेकता में एकता यही हमारे देश की विशेषता, हमारा देश धर्म और संस्कृति पर आधारित देश है यहां प्रतिदिन कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है। गणेश महोत्सव के बीच में तीन दिनों तक महालक्ष्मी माता की पूजा अर्चना की जाती है। महाराष्ट्रीयन समाज में महालक्ष्मी की विशिष्ट पूजा का काफी महत्व है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पर्व के दौरान भगवान गणेशजी की माता महालक्ष्मी की स्थापना के साथ पूजा की जाती है। इस दौरान ज्येष्ठा गौरी और कनिष्ठा गौरी की पूजा होती है। ज्येष्ठा और कनिष्ठा का आह्वान अनुराधा नक्षत्र में किया जाता है। जेष्ठा नक्षत्र में पूजन के साथ माता की अपने बेटे-बेटी के साथ नववारी साड़ी और कई प्रकार के आभूषणों में सुसज्जित कर स्थापना की जाती है और गोद भी भरी जाती है। रविवार से लेकर मंगलवार तक महाराष्ट्रीयन परिवारों में महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना के साथ ही आस्था का हर्षमयी आनंद भरा माहौल रहेगा। विट्ठल मंदिर के पुजारी राम श्याम आष्टेकर परिवार द्वारा यह पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। पर्व के दौरान मूर्तियों में अनाज भरा जाता है। ज्येष्ठा और कनिष्ठा की प्रतिमा को अनाज से भरकर सोलह श्रृंगार और नववारी साड़ी से सजाया जाता है। विधि-विधान से लक्ष्मी पद बनाकर स्थापना की जाती है। महालक्ष्मी पूजा तीन दिन होती है। पहले दिन ज्येष्ठा और कनिष्ठा का आगमन होती है। दूसरे दिन भोग-प्रसाद और श्रृंगार एवम ब्राम्हण भोज किया जाता है। तीसरे दिन मूल नक्षत्र में पोथी वाचन कर माता को विदाई देते हैं।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!