तन मन के हर तनाव की रामबाण औषधि है केकेएच अर्थात खूब खुलकर हंसीए, ,,राष्ट्रसंत श्री ललित प्रभ जी,,
खंडवा में जैन राष्ट्रीय संतों का हुवा आगमन श्रद्धालुओं ने किया स्वागत अभिनंदन,

संतो के स्वागत में निकली भव्य शोभा यात्रा,
पुरानी अनाज मंडी में प्रवचन का हुआ आयोजन, आज भी होंगे संतो के प्रवचन,
खंडवा ।। राष्ट्रीय संत ललित प्रभ और शांतिप्रिय महाराज साहब का खंडवा नगर आगमन हुआ यहां पड़ावा स्थित आयोजन समिति के प्रमुख विजय जैन के निवास से भव्य शोभा यात्रा निकली जो खंडवा के प्रमुख मार्गो से होते हुए घंटाघर स्थित पार्श्वनाथ मंदिर पहुंची। यहां संतों ने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए ।यहां जैन समाज की मातृ शक्तियों ने संतों की अगवानी की। यहां से राष्ट्रीय संत अनाज मंडी पहुंचे अनाज मंडी में ठीक 9:00 बजे प्रवचन शुरू हुए इसमें राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि इस जिंदगी को हम भुनभुनाते हुए नहीं गुनगुनाते हुए जीएं। अपने जीवन का पहला मूलमंत्र इसे बना लें कि मैं यह जीवन आह… आह… करके नहीं वाह… वाह… कहते जीऊंगा। जब भी हम वाह… कहते हैं तो यही जिंदगी हमारे लिए स्वर्ग बन जाती है और जब हम आह.. . कहते हैं तो जिंदगी नर्क-सी हो जाती है। अगर हमारे लिए थाली में भोजन आया है तो शुक्रिया अदा करो देने वाले भगवान का, अन्न उपजाने वाले किसान का और घर की भागवान का। जरा कल्पना करें आज से 50 साल पहले लोगों के पास आज जैसा भौतिक सुख भले कम था पर सुकून बहुत था। उस वक्त जब सुकून बहुत था, तो आदमी बड़े चैन से सोता था। आज सुख है तो भी लोग पूरी रात चैन से सो नहीं पाते। आज आदमी की जिंदगी कैसी गजब की हो चुकी है, बेडरूम में एसी और दिमाग में हीटर।
संत प्रवर बुधवार को सकल जैन संघ द्वारा रामकृष्ण गंज स्थित पुरानी अनाज मंडी में आयोजित दो दिवसीय प्रवचन माला के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारा यह जीवन परम पिता परमात्मा का हमारे लिए दिया हुआ बहुत बड़ा वरदान है। यदि कोई मुझसे पूछे कि दुनिया में सबसे कीमती वस्तु क्या है तो मैं कहूंगा जीवन। हो सकता है दुनिया में सोना, चांदी, हीरा, माणक, मोती का मूल्य होता हो लेकिन जीवन है तो चांद-सितारों का और इन सबका मूल्य है। यदि जीवन ही नहीं तो इनका सबका मूल्य ही क्या। कल्पना करो कि जीवन नहीं हो तो हमारे लिए किस चीज का मूल्य है। जीवन के हर क्षण, हर पल को हमें आनंद-उत्साह से भर देना चाहिए, अगर प्रेम, आनंद-उल्लास, माधुर्य से जीना आ जाए तो आदमी मर कर नहीं जीते-जी स्वर्ग को पा सकता है।
उन्होंने कहा कि पत्थर में ही प्रतिमा छिपी होती है, जरूरत केवल उसे हमें तराशने की है। कोरोना काल ने लोगों को जीवन की सांसों की कीमत याद दिला दी, आॅक्सीजन और चंद सांसों की कीमत तब उसे पता चली। हमारे जीवन की एक-एक सांस किनती कीमती है। विश्व विजय पर निकला सिकंदर को जिंदगी की कीमत का पता तब चला जब जीवन के अंत समय में वह अपने पूरे साम्राज्य के बदले भी चंद सांसें नहीं खरीद सका। शरीर छोड़ने से पहले वह यह कह गया कि वो सिकंदर जिसने पूरी दुनिया को जीता था-वो अपनी ही जिंदगी से हार गया। ये जिंदगी फिर ना मिलेगी दोबारा। और फिर कब मिलेगी यह भी हमें पता नहीं। इन बंगलों, इन फार्म हाउसों, इन महलों की उम्र कितनी, आंख बंद करने जितनी। आंख बंद कब हो जाए, यह भी हमें पता नहीं।
दुनिया में हर आदमी तीन पेज की डायरी साथ लाता है
राष्टसंत ने जीवन के मर्म को सुगम-बोधगम्य शैली में समझाते हुए कहा कि दुनिया में हम जब आते हैं तो अपने साथ 3 पन्नों की डायरी लेकर आते हैं। जिसका का पहला और अंतिम पन्ना ऊपरवाला लिखता है। उस डायरी का पहला पन्ना है- जन्म। और आखिरी पन्ना है मृत्यु। उस डायरी का पहला और आखिरी पन्ना हमारे हाथ में नहीं है, केवल बीच का पन्ना हमारे हाथ है, जिसका नाम है जिंदगी।
जो गया उसका रोना रोने की बजाय
जो है उसका आनंद लेना सीख जाएं
संतप्रवर ने कहा कि जिंदगी जीने के दो तरीके हैं- या तो जो खोया है, उसका रोना रोओ, या जो बचा है उसका आनंद मनाओ। तय आपको करना है, आप कैसी जिंदगी जीएंगे। जीवन का यह सिद्धांत बना लें कि जो मेरा है वो जाएगा नहीं और जो चला गया वो मेरा था ही नहीं। इस मंत्र को लेकर जो जीवन जीता है, वह जिंदगी में कभी दुखी नहीं होता। सुख आए तो हंस लो, और दुख आए तो हंसी में टाल दो- यही जीवन का मूलमंत्र है। समाज के प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि दादाजी की नगरी खंडवा में दोनों संतों के आगमन से हर्ष व्याप्त है
संत ललित प्रभ जी और मुनि शांतिप्रिय जी के खंडवा आगमन पर युवाओं ने जयकारे लगाए श्रद्धालु बहनों ने अक्षत उछालकर संतों का स्वागत किया।
इससे पूर्व डाॅ मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने कहा कि सदाबहार खुश रहने का कीमिया मंत्र हैः हर हाल में मुस्कुराइए। अनुकूलता में हर कोई मुस्कुरा लेता है, पर जो प्रतिकूलता में भी मुस्कुराना सीख जाता है, वह धरती का सबसे सुखी इंसान बन जाता हे। उन्होंने कहा कि तन-मन के हर तनाव की रामबाण औषधि है केकेएच अर्थात् खूब खुलकर हँसिए। हँसने और मुस्कुराने से तन के रोग कटते हैं और मन की गाँठें खुलती हे। अनाज मंडी में व्याख्यान सुनने के लिए सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। इस दौरान आयोजन समिति के विजय जैन ,रोहित मेहता ,नवनीत बोथरा , अभय जैन,मेघराज जैन वाडीलाल पटेल, के साथ शहर के गण मान्य नागरिक नवीश बोथरा आलोक सेठी, लखन नागोरी, सुनील बंसल, चंद्र कुमार सांड ,ओम गोयल,सोभाग सांड अरुण बाहेती,दिलीप पहाड़िया, समाजसेवी सुनील जैन, नारायण, अनिल बाहेती,जय नागडा, पीयूष चौरडिया, देव जैन , वीरेंद्र जैन, प्रदीप
कासलीवाल,बसंतीबाई जैन , राखी जैन, रानी बोथरा,वैशाली मेहता सहीत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।श्वेतांबर जैन समाज के प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड ने बताया कि जीवन को कैसे बनाएं मालामाल विषय पर संत श्री गुरु वार को पुरानी अनाज मंडी में सुबह 9 से 11 बजे तक विशेष प्रवचन और सत्संग करेंगे। व्याख्यानमाला का संचालन नवनीत बोथरा ने किया आभार विजय जैन ने माना।












