महाराष्ट्र: अहमदनगर/नेवासा तालुक में प्रवर संगम के तट पर सिद्धेश्वर मंदिर के मठाधीश बालयोगी महेश्वरानंद जिम महाराज 24 साल के हैं।उन्होंने गुप्त नवरात्रि के दौरान कठिन साधना की है। उन्होंने कलश को अपनी छाती पर रख लिया और लगातार दस दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए पीठ के बल लेटे रहे.आज उन्होंने अपनी साधना समाप्त कर ली है.जब मीडिया ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की तो उनके स्वयंसेवकों ने कहा कि यह सनातन धर्म की शाश्वत शक्ति है.और यह साधना केवल सनातन धर्म में ही संभव है। जो कोई भी यह साधना करता है वह सिद्ध पुरुष बन जाता है और उसे ईश्वर की प्राप्ति अवश्य हो जाती है।
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