
*अंतर प्रांतीय सिंधी साहित्य सम्मेलन में हुआ सिन्धी साहित्य में महिला विमर्श*

खंडवा। मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग भोपाल के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर प्रांतीय सिंधी साहित्य सम्मेलन एवं संत हिरदाराम साहित्य गौरव सम्मान समारोह का दिव्तीय दिवस रविवार को अतिथियों व्दारा माँ सरस्वती, माँ हिगलाज, भगवान श्री झुलेलाल एवं परम् श्रद्धेय संत हिरदाराम जी के छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर सत्र आरम्भ हुआ। यह जानकारी देते हुए राष्ट्रीय सिंधी समाज प्रदेश प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि प्रथम सत्र सिन्धी साहित्य में महिला विमर्श विषय में मुख्य वक्ता डॉ. विम्मी सदारंगाणी ने आज की महिलाओं के सोच एवं स्वत्रंत रहन सहन पर पाश्चात्य संस्कृति के समावेश का विस्तृत उल्लेख कर अपना सारगर्भित आलेख प्रस्तुत कर उपस्थित महिलाओं को पुरूष के प्रति अपना नजरिया बदलने की बात कर आत्म मंथन के लिये मजबूर कर दिया। विषय की भूमिका द्रोपदी चंदनाणी एवं सत्र की अध्यक्षता डॉ. कमला गोकलाणी, अतिथि के रूप में शत्रुघ्न केशवाणी, महेश मूलचंदानी, सिंधी साहित्य अकादमी निदेशक राजेश वाधवानी रहे। संचालन चित्रा चेलाणी ने किया। दिव्तीय सत्र में सिन्धी साहित्य में युवा विमर्श विषय पर मुख्य वक्ता प्रकाश तेजवाणी ने युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। सत्र की अध्यक्षता अशोक जमनानी एवं विषय की भूमिका प्रिया वछाणी ने बांधी। संचालन सागर उदासी किया। तृतीय सत्र में सिन्धी साहित्य में अनुवाद स्थिति, संभावना, महत्व और ज़रूरी कोशिशें विषय पर मुख्य वक्ता रश्मि रामाणी ने आलेख प्रस्तुत किया। विषय की भूमिका डॉ. नादिया मसंद, अध्यक्षता अशोक मनवाणी, अतिथि के रूप में कविता ईसरानी उपस्थित थी। संचालन राकेश शेवाणी ने किया। सिंन्धी और संस्कृत का नाता विषय पर संस्कृत के मंत्र से शुरूआत करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. जितेंद्र थडाणी ने आलेख के माध्यम से कहा कि किसी भी भाषा को देखने के लिये पांच शब्दों की जरूरत होती है। आज के समय हमारी बोल चाल की भाषा में अधिकांश शब्द संस्कृत के समाहित हैं। अनेक सिन्धी शब्दों को संस्कृत से तालमेल कर बताया गया। अध्यक्षता हरीश करमचंदानी ने की। अतिथि के रूप में राजेन्द्र सचदेव मौजूद थे। विषय की भूमिका डॉ. चारुमित्रा माखीजानी रानाडे जी ने बांधी। सत्र संचालन विनीता मोटलाणी ने किया। इस मौके पर अहमदाबाद के वरिष्ठ सिन्धी साहित्यकार डॉ. जेठो लालवानी, भगवान बाबाणी, डॉ संतोष खत्री धुलिया, राजकुमार बसंत, नारी लच्छवानी, द्रोपती चांदवानी, निर्मंल मंगवानी, मनीष मलानी खंडवा, मुरलीधर चंदवानी, कोल्हापुर, कशिश सीतलानी, राजेन्द्र सचदेव इंदौर, सुरेश पारवानी, बैरागढ़, भोपाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश अयोध्या, गुजरात आदिपुर कच्छ, महाराष्ट्र मुम्बई, कल्याण, राजस्थान जोधपुर, रोमा चांदवानी जयपुर, गोवा, दिल्ली, सहित भारत भर के अनेक शहरों से लगभग 142 साहित्य सर्जन मौजूद थे। समापन पर उपस्थित सभी साहित्य सर्जनकारों को प्रमाण पत्र सौप कर मातृभाषा के विस्तार हेतु सटीक प्रयास करने की अपील की गयी।










