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जीवन में आह….आह कर दुखी होने के बजाय, वाह… वाह कर आनंद लेना चाहिए, ,,,राष्ट्रीय संत श्री ललित प्रभ जी,,,

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जीवन में आह….आह कर दुखी होने के बजाय, वाह… वाह कर आनंद लेना चाहिए, ,,,राष्ट्रीय संत श्री ललित प्रभ जी,,,

जो नहीं है, उसका रोना रोने के बजाय, जो है उसका आनन्द उठाना सीखें।

राष्ट्र-संतों का खंडवा शहर में धूमधाम से हुआ मंगल।

पुरानी अनाज मंडी में जीने की कला पर 3 दिवसीय विराट प्रवचन माला का हुआ शुभारंभ।

खंडवा। दुनिया में जब हम आते हैं तो तीन पन्नों की डायरी साथ लेकर आते हैं, डायरी का पहला पन्ना जन्म है, तो अंतिम पन्ना मृत्यु, केवल बीच का एक पन्ना हमें खाली मिलता है, जिसका नाम है जि़ंदगी तय आपको करना होता है कि इस खाली पन्ने में आप क्या भरते हैं, ये खाली पन्ना ही आपके जीवन को तय करता है और आपका जीवन ही इस खाली पन्ने को भरता है यह उदगार अनाज मंडी में आयोजित प्रवचन माला के प्रथम दिन राष्ट्रीय संत महोपाध्याय श्री ललित प्रभ सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। महाराज श्री ने कहा कि जि़ंदगी में सफलता और शांति का मायना इतना ही है जो हमें प्राप्त है उसका आनन्द लें। जो आपने चाहा, वह मिल गया, इसका नाम सफलता है और जो आपको मिला है, आपने उसे ही प्रेम से स्वीकार कर लिया, उसीका ही नाम शांति है। जो नहीं है, उसका रोना रोने के बजाय, जो है उसका आनन्द उठाना सीख लें तो हमारी जि़ंदगी जन्नत बन सकती है। हर हाल में खुश रहना, जिंदगी का यही मंत्र होना चाहिए। प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड सुनील जैन ने बताया कि राष्ट्र-संत बुधवार को सकल जैन समाज और जैन युवक महासंघ YMS के तत्वावधान में पुरानी अनाज मंडी, रामकृष्ण गंज में जीने की कला पर 3 दिवसीय प्रवचन माला का श्री गणेश करते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। संतप्रवर ने कहा कि हमारा यह जीवन परमपिता परमेश्वर का दिया हुआ वरदान है। दुनिया में इससे ज्यादा बेशकीमती और कुछ नहीं हो सकता। कल्पना कीजिए इस दुनिया में सब कुछ हो, पर हमारा जीवन न हो, तो पूरी दुनिया क्या काम की रहेगी? हमें जीवन के हर पल को आनन्द और उत्साह से भरना चाहिए। अगर प्रेम, माधुर्य और आनन्द से जीवन जीना आ जाए तो व्यक्ति जीते जी धरती को स्वर्ग बनाने में सफल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारा जीवन परम पिता परमेश्वर का प्रसाद है। इसे विषाद बनाना हमारे जीवन की भूल है। जब जो हो जाए, उसे आह… आह… कहकर दुखी होने की बजाय वाह…वाह… कहकर जीवन के हर पल का आनंद लेना चाहिए। थाली में आए हुए भोजन में कमी निकालने की बजाय हमें भगवान का शुकराना अदा करना चाहिए, जिसकी कृपा की बदौलत हमें भोजन मिला है। कड़ी मेहनत करके अन्न उपजाने वाले किसान और 46 डिग्री गर्मी में भी किचन में खाना बनाने वाली भागवान का शुकराना अदा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मन की शांति को उतना ही मूल्य दीजिये जितना कि आप अपनी पत्नी और पैसे को देते हैं। मूर्ख और गलत व्यक्ति को दोस्त बनाने की बज़ाय आपका अकेला रहना ज्यादा फायदेमन्द है। गुलाब की तरह सदा इतने प्रसन्न रहिए कि चिंता के काँटे आपको छू भी न पाएँ। मरने के बाद स्वर्ग उन्हीं को मिला करता है, जिनका वर्तमान जीवन स्वर्ग है। क्रोध और ईर्ष्या का त्याग करते हुए प्रेम और शांति को अपनाइये, ताकि आपके लिए स्वर्ग का द्वार खुल सके। सुनील जैन ने बताया कि इससे पूर्व डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को नवकार महामंत्र गायत्री महामंत्र और शांति महामंत्र का सामूहिक संगायन करवाते हुए कहा कि खंडवा आकर जितने यहां के लोग खुश हुए हैं उससे ज्यादा हम खुश हुए हैं क्योंकि आज हमारा 7 महीने पहले आने का किया हुआ वादा पूरा हो गया। हमें आनंद तो बहुत आया पर जो आनंद खंडवा में आया वह कभी नहीं आया।
उन्होंने कहा कि जीवन में तनाव को जगह नहीं दें, हमेशा मुस्कुराते रहें मुस्कान से कोई नुकसान नहीं होता मुस्कान अनमोल है। प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड,सुनील जैन ने बताया कि इस अवसर पर राष्ट्र-संतों के खंडवा आगमन पर उनकी भव्य अगवानी की गई। इस अवसर पर भव्य शोभा यात्रा – वरघोडा का आयोजन पंधाना रोड स्थित द्वारका ट्रेड सेंटर से शुरू हुआ जो पुरानी अनाज मंडी पर समापन हुआ। इस दौरान श्रावक-श्राविका- नवयुवक- बालगोपाल ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लिया, बहने लाल चुनरी में एवं भाई श्वेत वस्त्र, पारंपरिक वेशभूषा में गुरुदेव के जयकारे लगा रहे थे। इस अवसर पर शहर के विशिष्ट लोगों के द्वारा पूरे शहर में राष्ट्र-संतों का नागरिक अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन आयोजन समिति के विजय जैन ने दिया ।मंच संचालन नवनीत बोथरा ने किया। कार्यक्रम में विजय जैन,रोहित मेहता, नवनीत बोथरा, तपन डोंगरे, अभय जैन, सुभाष मेहता, मेघराज जैन, सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी, वाडीलाल पटेल, चंद्रकुमार सांड विशेष रूप से उपस्थित थे। गणमान्य नागरिकों में डॉ. नरेंद्र जैन,आलोक सेठी, प्रमोद जैन, योगेश मेहता, राजेंद्र घीया ओमप्रकाश अग्रवाल, वीरेंद्र भटटायन, सुनील जैन, देवेंद्र जैन, सौभाग्य सांड, जगदीश चंद्र चौरे महिलाओं में सेजल मेहता, सरोज बोथरा,सुशीला जैन,आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में समस्त जैन समाज के साथ समस्त राजस्थानी समाज, गुजराती समाज, मारवाड़ी समाज के सभी श्रद्धालु भाई-बहनों ने भाग लिया।प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड ने बताया कि गुरुवार को सुबह 9.15 से 11.15 बजे तक घर को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर विशेष सत्संग प्रवचन होंगे।

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