
कुशीनगर /सुकरौली विकासखंड के पिडरा ग्राम सभा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया एनएम सेंटर वर्षों से अधूरा पड़ा है। लाखों रुपये की लागत से शुरू हुई यह परियोजना न सिर्फ बीच में रुक गई, बल्कि अब यह भवन ग्रामीणों के लिए परेशानी का केंद्र बन चुका है। मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि अधूरे कमरे, गिरती प्लास्टर की सतहें और टूटी खिड़कियाँ इस बात की गवाही देती हैं कि यहां पिछले लंबे समय से कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र की जगह अब यहां जुआरियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। भवन के भीतर ताश के पत्ते, शराब की बोतलें और पान-गुटखा की छींटें साफ दिखती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होने के बाद इस जगह पर माहौल पूरी तरह बिगड़ जाता है।
स्थानीय निवासी गंगाराम बताते हैं, “साहब, यह सेंटर हमारे स्वास्थ्य के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यहां गलत काम होने लगे हैं। रात में कोई यहां आने की हिम्मत नहीं करता।”
जांच में पता चला कि एनएम सेंटर का निर्माण लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंचकर रोक दिया गया था। ठेकेदार के द्वारा कार्य अधूरा छोड़ देने और विभागीय निरीक्षण के अभाव के कारण भवन इसी अवस्था में पड़ा है। न दरवाजे लगे, न प्लास्टर पूरा हुआ, न फर्श बन पाया—सब कुछ आधा-अधूरा।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है, “ग्राम सभा पिडरा का यह एनएम सेंटर अगर पूरा हो जाता, तो आसपास के दर्जनों परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती थी। लेकिन आज यह सरकारी फाइलों और अधिकारियों की लापरवाही का शिकार है।”
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से इसकी मरम्मत और पूर्ण निर्माण की मांग की है, मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों की चिंता है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो यह अधूरा भवन किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
पिडरा के ग्रामीण अब जिला प्रशासन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं, ताकि यह अधूरा स्वास्थ्य केंद्र अपने असली उद्देश्य को पूरा कर सके और जुआरियों के अड्डे की छवि से बाहर निकल सके।










