
पिच्छीका जीव जंतुओं की रक्षा एवं संयम का महत्वपूर्ण उपकरण है।
साधु-संतों के सत्संग का लाभ सभी श्रद्धालु ले, ,विश्रुत सागर,

चातुर्मास के दौरान पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव का आयोजन संपन्न।
खंडवा।। भगवान महावीर के बताएं मार्ग पर जैन धर्म के सामाजिक बंधु एवं साधु संत अहिंसा को अपनाकर पुन्यार्जन करते है। दिगंबर जैन साधु संतों के पास सिर्फ दो उपकरण होते हैं एक पीछिका जिससे जीव जंतुओं की रक्षा की जाती है संयम का पालन किया जाता है, दूसरा कमंडल जिसके पानी से शुद्धी की जाती हे। मोर पंख से निर्मित पीच्छीका बहुत कोमल होती है पीछी की तरह ही यदि हमारा हृदय भी कोमल हो जाए तो इससे बड़ा सुख और कोई हो नहीं सकता पीछि ग्रहण करने वाला ही मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। यह उदगार खंडवा में चातुर्मास कर रहे हैं उपाध्यक्ष श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने पीछि परिवर्तन महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये। जैन धर्मशाला में आयोजित महोत्सव को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष श्री ने कहा कि पीछिका संयम का महत्वपूर्ण उपकरण है दिगंबर जैन साधु संतों की यह पहचान है, वर्ष भर के उपरांत पीछि का परिवर्तन किया जाता है,संयम मार्ग की ओर अग्रसर होने वाला श्रावक ही साधु संतों की पुरानी पीछि को प्राप्त कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का साधक बन जाता हें। उपाध्यक्ष श्री ने कहा कि नगर में सुख शांति बनी रहे और परिवार के कल्याणार्थ आप सभी का दायित्व है कि साधु-संतों के आगमन पर उनके सत्संगों का लाभ लेकर अपने जीवन को सुखमय बनाए। आज के इस आधुनिक युग में समय किसी पास नहीं है लेकिन हमें हमारे परिवार के कल्याणार्थ और हमारे जीवन को सफल बनाने के लिए प्रभु और गुरू भक्ति से जुडऩा होगा। अतिशयकारी भगवान पार्श्वनाथ के समीप संस्कारों की इस नगरी में हमारा प्रथम चातुर्मास सा आनंद संपन्न होने जा रहा हें, सभी ने चातुर्मास के दौरान हुए कार्यक्रमों में भाग लेकर पुण्यार्जन किया। सभी को आशीर्वाद समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जैन धर्म में साधु संतों की तपस्या काफी कठिन होती है 24 घंटे में सिर्फ एक ही बार जल और अन्न आहार के रूप लेते हैं और वर्षा काल के दौरान चातुरमास के माध्यम से 4 महीने एक ही स्थान पर रुककर धर्म की प्रभावना करते हैं चातुरमास के पश्चात बड़े कार्यक्रम के रूप में पिछीका परिवर्तन महोत्सव आयोजित होता है। उपाध्यक्ष श्री विश्रुत सागर मुनि श्री निर्वेद सागर एवं गुरु भ्राता आराध्य सागरजी महाराज के सानिध्य मे पीछि का परिवर्तन महोत्सव का आयोजन आयोजित हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में अलग-अलग स्थानो से श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पुण्य प्राप्त किया। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम में मुनि संघ का पाद पक्षालन अनिल वरदाना एवं शिवनगर जबलपुर, विशाल कैलाश विवेक बीड वाले परिवार एवं शास्त्र भेट पवन जैन पाटौदी कोटा, सपना जितेंद्र सुरेश लोहाडिया, विनय ऋषि दमोह परिवार द्वारा प्रदान किये गए। विश्रुत सागर सागर महाराज की पीछी कीर्ति पहाड़िया एवं निर्वेद सागर जी महाराज की पिछी विजय जैन जबलपुर परिवार ने प्राप्त की। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि आयोजित कार्यक्रम में आचार्य श्री एवं मुनि संघ का संगीतमय पूजन किया गया, बाहर से पधारे अतिथि एवं चातुर्मास के दौरान सेवा कार्यों में सम्मिलित श्रद्धालुओं का सम्मान भी किया गया। महोत्सव में समाज के अध्यक्ष विरेन्द्र भट्यांण, विजय सेठी, अविनाश जैन, कैलाश पहाड़िया, पंकज जैन महल, अर्पित भैया, सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी, सुभाष सेठी डॉक्टर पंकज जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। संगीत में पूजन एवं भजनों की प्रस्तुति हर्ष जैन द्वारा प्रस्तुत की गई एवं एवं कार्यक्रम का संचालन अंकित जैन कोटा एवं ब्रह्मचारी पारस भैया द्वारा किया गया एवं आभार कैलाश पहाड़िया अविनाश जैन पंकज महल द्वारा माना गया।












