- त्रिलोक न्यूज़ मध्य प्रदेश सहायक प्रमुख प्रवीण कुमार दुबे 8839125553

- नियम }सरकारी योजना में लाभ के लिए एम्स की लैब में ही जांच कराना जरूरी
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में मरीजों की जांच की व्यवस्था चरमरा गई है। यहां हर दिन 7 हजार मरीज आ रहे हैं। उन्हें कुछ बेसिक ब्लड टेस्ट आरएफटी, एलएफटी और लिपिड प्रोफाइल लिखा जा रहा है। लेकिन ये बेसिक जांचें भी नहीं हो पा रही हैं। हैरत की बात यह है कि ब्लड सैंपल कलेक्ट करने के लिए मरीजों के परिजनों को खुद लंबी-लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। टोकन सिस्टम भी खत्म कर दिया गया है। इससे यहां धक्कामुक्की जैसा माहौल बन गया है।
हैरत की बात यह है कि इस स्थिति को देखते हुए एम्स के डॉक्टर्स बाहर से जांच कराने के लिए कह रहे हैं। लेकिन बाहर से जो जांचें कराई हैं, उन्हें सत्यापित नहीं कर रहे हैं। एम्स ने अपने नोटिस बोर्ड में लिखवा रखा है कि किसी भी सरकारी स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी डॉक्टर द्वारा लिखी गई सभी दवाइयां और जांचें एम्स भोपाल में उपलब्ध अमृत फार्मेसी या जन औषधि केंद्र से खरीदें। एम्स की ही प्रयोगशालाओं में जांच कराएं। लेकिन एम्स की प्रयोगशाला में जांच ही नहीं हो पा रही है।
एलएफटी, आरएफटी और लिपिड प्रोफाइल जैसी बेसिक जांचों के लिए रिएजेंट खत्म
एक हफ्ते से अटकी जांचें: हालात ऐसे हैं कि एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), आरएफटी (रीनल फंक्शन टेस्ट) और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें पिछले एक हफ्ते से अटकी हुई हैं। बिलीरुबिन जांच में पीलिया और लिवर की बीमारियों का पता चलता है। क्रिएटिनिन जांच किडनी की कार्यक्षमता जानने के लिए जरूरी है। एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल) जांच से हार्ट की सेहत और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जानने के लिए की जाती है। जीजीटी (गामा जीटी) जांच लिवर डैमेज और शराब से हुई हानि मापने के लिए होती है।
टोकन सिस्टम खत्म: अब तक ब्लड सैंपल कलेक्शन के लिए टोकन सिस्टम लागू था। मरीज आराम से नंबर आने का इंतजार करते थे। लेकिन हिंद लैब का कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद से यह व्यवस्था बंद कर दी गई। अब मरीजों के परिजन सीधे लाइन में लग रहे हैं।
रिएजेंट खत्म, मशीनें खाली पड़ीं : एम्स की पैथोलॉजी लैब में रिएजेंट खत्म हो चुके हैं। यही कारण है कि ब्लड टेस्ट मशीनें खाली पड़ी हैं। डॉक्टर मजबूरी में मरीजों को इधर-उधर भटकने के लिए छोड़ रहे हैं। एम्स का दावा है कि रिएजेंट सप्लाई आने वाली है।
एम्स प्रबंधन का तर्क: अनुबंध खत्म होने के बाद हिंद लैब अपना टोकन सिस्टम निकालकर ले गए। हमने अपना टोकन सिस्टम मंगवाया है। एक माह में यह चालू हो जाएगा। ब्लड सैंपल के लिए अनुबंध किया जा रहा है। एक सप्ताह में सभी जांचें एम्स में ही शुरू हो जाएंगी।










