*श्री महाकालेश्वर भगवान की राजसी सवारी मार्ग को बढ़ाए जाने के संबंध में महापौर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा*
🎇 त्रिलोक न्यूज चैनल उज्जैन
महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट की ओर सवारी के जाने के मार्ग को परिवर्तित करने की मंशा महापौर मुकेश टटवाल ने जताई है।
दिनांक 18 अगस्त 2025 सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर की राजसी सवारी नगर में परंपरागत मार्ग से होकर निकलेगी भगवान के दर्शनों हेतु राजसी सवारी में अपेक्षाकृत अत्यधिक संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का आगमन उज्जैन में होता है श्रद्धालु सवारी मार्ग पर खड़े होकर भगवान की सवारी के दर्शन लाभ प्राप्त कर करते हैं।
राजसी सवारी का परंपरागत मार्ग जिसमें महाकालेश्वर मंदिर से गुदरी चौराहा होते हुए पानद्रीबा, रामानुज कोट होते हुए रामघाट तक लगभग 800 मी का सवारी मार्ग 6 से 9 मीटर तक ही चौड़ा है और अधिकांश श्रद्धालु इसी मार्ग पर सवारी के दर्शन करते हैं इस कारण इस मार्ग पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ हो जाती है धक्का मुक्की होती है तथा श्रद्धालुओं को भी सुविधा होती है।
उक्त संबंध में महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट की और सवारी के जाने के मार्ग को परिवर्तित कर श्री महाकालेश्वर मंदिर से बड़ा गणेश मंदिर ल, विक्रमटीला, शेर चौराहा, हरसिद्धि मंदिर, राम मंदिर, रामानुज कोट, बम्बई वाले की धर्मशाला होते हुए रामघाट पर पहुंचे और इसके उपरांत सवारी अपने परंपरागत मार्ग से आगे बड़े श्री महाकालेश्वर मंदिर से रामघाट तक का यह मार्ग दूरी में 1 किलोमीटर से भी कुछ अधिक होकर मार्ग अपेक्षाकृत अधिक चौड़ा औसतन 9 से 20 मीटर है इस मार्ग को अपनाने से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं सवारी के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालुओं की मार्ग पर पहुंच भी आसान होने से श्रद्धालुओं को सुविधा होगी तथा प्रशासन को भी भीड़ प्रबंधन में आसानी होगी।
महापौर श्री मुकेश टटवाल द्वारा मुख्यमंत्री जी से अनुरोध किया है कि यदि उपरोक्त अनुसार राजसी सवारी के मार्ग में आंशिक परिवर्तन किया जाता है तो न सिर्फ स्थानीय अपितु देश विदेश से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान की सवारी के सुलभ दर्शन प्राप्त हो सकेंगे कोविड के दौरान भी भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के लिए इस मार्ग को अपनाया गया था।






