मंगल पांडे ने भड़काई क्रांति की ज्वाला-शिवानी जैन एडवोकेट

ऑल ह्यूमंस सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि भारत को आजादी दिलाने के लिए कई वीरों ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। आजादी पाने के लिए कई वर्षों कर लड़ाई लड़ी गई। सन 1857 में सबसे पहले अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंकी गई थी। देश के लिए अपने प्राणों की परवाह न करने वाले वीर सपूत में मंगल पांडेय का नाम भी शामिल है। 08 अप्रैल को मंगल पांडेय को फांसी की सजा दे दी गई थी।
थिंक मानवाधिकार संगठन एडवाइजरी बोर्ड मेंबर डॉ कंचन जैन ने कहा कि अंग्रेसी शासन ने अपनी बटालियन को एनफील्ड राइफल दी थी। इस राइफल का निशाना अचूक था। लेकिन इसमें गोली भरने की प्रक्रिया काफी पुरानी थी। इस बंदूक में गोली भरने के लिए कारतूस को दांतों से खोलना पड़ता था। जिसका मंगल पांडेय ने विरोध करना शुरूकर दिया।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक आलोक मित्तल एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, डॉ एच सी आरके जैन, डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन आदि ने कहा कि बंगाल की बैरकपुर छावनी का माहौल उस दिन बहुत उदास और बोझिल सा था। सुबह जब रेजिमेंट के सिपाही रातभर की नींद के बाद तड़के उठने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि तड़के मंगल पांडे को फांसी दे दी गई है। इसके बाद पूरी छावनी में तनाव पसर गया।किसी को अंदाज नहीं था कि मंगल पांडे को समय से 10 दिन पहले ही फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा। उनकी फांसी की सजा तो 18 अप्रैल को मुकर्रर की गई थी।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ









