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अम्बेडकरनगर में सांसद रितेश पाण्डेय को पाकर जीत की उम्मीदों में भाजपा गदगद ।

बसपा संसदीय दल छीनने के बाद पार्टी सुप्रीमो से बनी दूरियां

अयोध्या।
लोकसभा की हारी हुई सीटो को लेकर विशेष मुहिम में जुटी भाजपा ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा सांसद रितेश को पार्टी में शामिल कर जीत की उम्मीदों को नया बल प्रदान किया है। लगभग एक वर्ष से रितेश के बीजेपी या सपा में शामिल होने की अटकलें थीं। लेकिन सपा से पूर्व मंत्री लालजी वर्मा को टिकट मिलने के बाद से उनके भाजपा में जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया। इस पर अंतिम मुहर बीते दिनों पीएम के साथ संसद भवन में हुये लंच के बाद लग गई थी। फिर हाल रितेश पाण्डेय को पाकर भाजपा अम्बेडकरनगर लोकसभा चुनाव जीत की उम्मीदों को लेकर अभी से ही उत्साहित है।
बसपा सांसद रितेश का पार्टी छोड़ना कोई चौंकाऊ नहीं है। इसकी पटकथा बीते विधानसभा चुनाव के दौरान ही लिख उठी थी। हुआ यह कि वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान रितेश के पिता पूर्व सांसद राकेश पांडेय ने बसपा छोड़कर सपा की सदस्यता ले ली। सपा ने उन्हें जलालपुर से टिकट दिया। राकेश पांडेय वर्ष 2002 में सपा से जलालपुर से ही विधायक रहने के बाद 2022 में फिर से सपा के टिकट पर विधायक चुन लिए गये।
राकेश पांडेय के बसपा छोड़ने से पूर्व मुख्यमंत्री मायावती नाराज हो गईं। उन्होंने रितेश को बसपा संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया। इसके बाद से ही रितेश पार्टी में अलग थलग पड़ गये। बसपा के कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाना बंद हो गया। इसके चलते ही उनके सपा या फिर भाजपा में जाने की अटकलें लगने लगी थीं। करीब एक वर्ष से रह रहकर चर्चाएं सामने आती थीं। सपा में उनके जाने की संभावना तब खत्म हो गई जब पार्टी ने लोकसभा सीट पर पूर्व मंत्री लालजी वर्मा को टिकट थमा दिया।
वर्ष 2019 में बसपा के टिकट पर सांसद बने रितेश को इसके बाद अपने पाले में करने के लिए भाजपा ने कदम आगे बढ़ाया। तमाम उहापोह के बीच रितेश ने अंतत: भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया। भाजपा ने रविवार को उन्हें नई दिल्ली में शामिल कराकर संकेत दिया कि यह लोकसभा सीट भी इस बार भी वह अपने कब्जे में करने की किसी कोशिश से पीछे नहीं हटेगी। सांसद को पाकर पार्टी के स्वजातीय नेता फुले नही समा रहे हैं।

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