
पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत सराफा मंदिर के पास आदि मुनि महाराज की आहार विधि संपन्न हुई।

सुधांशु चौधरी परिवार के साथ सैकड़ो श्रद्धालुओं ने मुनि श्री को गन्ने के रस का कराया आहार।
आहार विधि देखने के लिए सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु हुए उपस्थित।
खंडवा। संस्कार नगरी खंडवा में जैन समाज का बड़ा धार्मिक अनुष्ठान पंचकल्याणक महोत्सव देश के महान संत मुनि आदित्य सागर जी महाराज के ससंध सानिध्य में विधानाचार्य पीयूष जैन भैया जी के मार्गदर्शन एवं विधि विधान से अयोध्या नगरी तापड़िया बिजनेस पार्क में धार्मिक उत्साह के साथ चल रहा है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया पंचकल्याणक के चौथे दिन ज्ञान कल्याणक दिवस पर मुनि श्री के प्रवचन के साथ मंच पर अन्य कार्यक्रम आयोजित हुए। साथ ही नगर में पहली बार खुले रूप में मुनि आदि महाराज की आहार विधि सराफा क्षेत्र में संपन्न हुई। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की आहारचर्या का प्रसंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब भगवान ऋषभदेव ने दीक्षा ली, उसके बाद वे छह महीने के उपवास और छह महीने की मौन चर्या के बाद आहार के लिए निकले। समिति के पंकज सेठी ने बताया कि भगवान आदिनाथ प्रथम मुनि थे, इसलिए उस समय के लोगों को मुनिराज को आहार देने की विधि (नवधा भक्ति) ज्ञात नहीं थी। भगवान जिस भी नगर में जाते, लोग उन्हें हाथी, घोड़े, रत्न या अपनी पुत्रियाँ भेंट करने का प्रयास करते, जिसे भगवान स्वीकार नहीं करते थे। इस प्रकार सात महीने और नौ दिन और बीत गए। राजा श्रेयांस को ‘जातिस्मरण’ होना
जब भगवान आदिनाथ हस्तिनापुर पहुँचे, तो वहाँ के राजा सोमप्रभ के छोटे भाई राजा श्रेयांस को भगवान को देखकर अपने पूर्व जन्मों का स्मरण हो आया। उन्हें याद आया कि पिछले जन्म में उन्होंने मुनिराज को आहार कैसे दिया था। तभी उन्होंने मुनी आदि कुमार महाराज को गन्ने का रस आहार में दिया। समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि पंचकल्याणक के इस कार्यक्रम में बुधवार को मुनि आदि महाराज को आहार कराने का सौभाग्य हस्तिनापुर के राजा श्रेयांश एवं राजा सोमप्रभ बन सुधांशु रूपांशु , राजकुमारी ,स्वीटी, ऋषिका एवं चौधरी परिवार के साथ सैकड़ो श्रद्धालुओं ने मुनि आदि महाराज को गन्ने के रस का आहार प्रदान किया। सराफा पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के पास आज यह धार्मिक विधि देखने के लिए मुनि संघ के साथ बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित हुए। मुनि आदि महाराज की भूमिका विधानाचार्य पीयूष भैया जी द्वारा निभाई गई।सभी उपस्थितजनों का आभार चौधरी परिवार ने माना।










