
कुछ घंटे बाद ही डीजीपी के आदेशों की अवहेलना, सोते रहे चौकी इंचार्ज, व्यक्ति को कुचलकर भागने में सफल रहा डंफर
इंस्पेक्टर ने घायल को गोद में उठाकर भेजा स्वास्थ्य केंद्र
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#हरदोई: उत्तर प्रदेश के ग्रहगोपन मुखिया के महज कुछ घंटे पूर्व हुए सड़क हादसों के बाबत आदेश की अवहेलना कोतवाली क्षेत्र बेनीगंज के चौकी इंचार्ज प्रताप नगर दीपक कुमार ने कर दी, जहां समय रहते मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर बेनीगंज मार्तंड सिंह ने हालात को देखते हुए संभालने का प्रयास किया जिससे मुख्य प्रताप नगर चौराहा जाम की चपेट में आने से रहा। बताते चलें कि हरदोई से कोथावां की ओर जा रही डबल डेकर बस यूपी 51 एटी 2236 जब प्रताप नगर चौराहा पहुंची तो बघौली की ओर से सीतापुर की ओर जा रहे गिट्टी लदे डम्फर नंबर अज्ञात ने उसे टक्कर मार दी जिससे दोनों वाहन चालकों के बीच विवाद होने लगा, जिसे देख स्थानीय निवासी 28 वर्षीय कौशिक शुक्ला पुत्र देश दीपक शुक्ला मौके पर पहुंच कर बीच बचाव करने लगे उसी समय भागने की फिराक में डंफर चालक ने गाड़ी चला दी जिसके नीचे आए कौशिक शुक्ला गंभीर रूप से घायल हो गए। आस पड़ोसियों का कहना है कि मामले को लेकर चौकी इंचार्ज प्रताप नगर दीपक कुमार को कई फोन किए गए जिनका जवाब न मिलने पर चौकी पहुंचे लोगों को बताया गया कि इंचार्ज साहब सो रहे हैं। वहीं मौका पाकर डंफर चालक गाड़ी सहित सीतापुर की ओर भागने में सफल हो गया। नाराज पीड़ित परिवार ने मुख्य चौराहे को जाम करने का प्रयास किया तो मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर मार्कण्डेय सिंह ने घायल को स्वयं उठाकर अपने गाड़ी से कोथावां स्वास्थ्य केंद्र भेजा। जहां से इलाज हेतु परिजन उसे लेकर राजधानी के अस्पताल पहुंचे जहां उसकी मौत हो गई। इंस्पेक्टर मारकंडेय सिंह ने कहा चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच कर डंफर चालक को गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने उपरोक्त मामले को लेकर सीतापुर पुलिस से भी संपर्क साधने का प्रयास किया। पूछे जाने पर इंचार्ज दीपक कुमार ने कहा उच्च अधिकारियों के आदेश पर मैं बीती रात अपराधियों की गिरफ्तारी में व्यस्त था। स्थानीय निवासियों के अनुसार प्रताप नगर चौराहे पर बना गोल चक्कर अधिक भूमि पर है जिससे चारों ओर से आने वाले बड़े वाहनों को मुड़ने में समस्याएं होती हैं जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं उन्होंने कहा गोल चक्कर को सीमित किया जाए जिससे लोगों की जान बच सके। उनके अनुसार गोल चक्कर और वाहन के बीच अगर थोड़ी सी जगह होती तो कौशिक को आज जान से हांथ न धोना पड़ता।










