
ग्रामीण अंचल से अंतरराष्ट्रीय मंच तक नवाचारी विज्ञान शिक्षिका श्रद्धा गुप्ता की प्रेरक उड़ान
खण्डवा//
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रुस्तमपुर की विज्ञान शिक्षिका श्रीमती श्रद्धा गुप्ता गंगराडे ने नवाचार एवं तकनीक आधारित शिक्षण के माध्यम से विज्ञान शिक्षा को नई दिशा दी है।
श्रीमती गुप्ता विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे प्रयोगात्मक, रोचक और जीवन से जुड़ा बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने 3D वीडियो लेसन प्लान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शिक्षण, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक, माइन्क्राफ्ट एवं विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कक्षा को एक जीवंत प्रयोगशाला में परिवर्तित किया है। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम दिए हैं तथा विज्ञान के प्रति शोध और नवाचार की भावना विकसित की है।
उल्लेखनीय है कि उनका चयन लगातार तीन वर्षों से भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव हेतु किया गया। वर्ष 2025 में चंडीगढ़ के पंचकूला में उन्हें इस प्रतिष्ठित मंच पर अंतरिक्ष वैज्ञानिक सुधांशु शुक्ला (चंद्रयान मिशन से जुड़े भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक) द्वारा सम्मानित किया गया। इससे पूर्व वर्ष 2024 में उन्हें एस सोमनाथ चेयरमैन, ISRO द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ।
इसके अतिरिक्त राजभवन में राज्यपाल महोदया की उपस्थिति में शोध पत्र वाचन का गौरव, विज्ञान मंथन यात्रा हेतु जिले से चयन एवं मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान, तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मानों से सम्मानित होना उनके उत्कृष्ट कार्यों का प्रमाण है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर श्रीमती श्रद्धा गुप्ता ने संकल्प व्यक्त किया कि वे ग्रामीण अंचलों में विज्ञान शिक्षा को और अधिक तकनीक-समर्थ, शोधोन्मुख एवं नवाचार आधारित बनाने के लिए कार्य करती रहेंगी। साथ ही बालिकाओं को STEM शिक्षा से जोड़ने हेतु विशेष पहल प्रारंभ करने की भी उनकी योजना है।
उनका मानना है कि “विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के विकास की सबसे सशक्त आधारशिला है।”
श्रीमती श्रद्धा गुप्ता का यह कार्य शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी है और राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर उनका योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।







