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केशव विद्यापीठ में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

केशव विद्यापीठ में 21 फरवरी ‘‘ अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस ’’ बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार की शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गई जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागीता की। इस अवसर पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया जिसका विषय था ‘‘मातृभाषा का महत्व’’ जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

शिक्षिका श्रीमती मंजु पालिवाल ने अपने उद्बोधन मंे कहा कि प्रतिवर्ष मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है विश्व में भाषायी और सांस्कृतिक विवधता को बढ़ावा देना है। आज का दिन हमें मातृभाषा के प्रति जागरूकता फैलाने और अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व करने का दिन है। हमारी मातृभाषा हिन्दी है और हिन्दी हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व रखती है। हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध भाषाओं में से एक है और इसे करोड़ों लोग बोलते और समझते हैं। मातृभाषा हमारी सोचने और अभिव्यक्ति को स्पष्ट करने का सशक्त माध्यम है। जो बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करते है उन बच्चों में सीखने, समझने की प्रवृत्ति का विकास अधिक होता है। जीवन में हमें आगे बढ़ने के लिए अपनी मातृभाषा को सम्मान देना आवश्यक है। हिंदी हमारी मातृभाषा है हमारी पहचान है और हमें हिन्दी भाषा पर गर्व होना चाहिए।

इस अवसर पर शिक्षिका श्रीमती सुनिता तनपुरे ने बताया कि ढाका में बांग्ला को आधिकारिक भाषा बनाने की मांग को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें कई छात्र शहीद हुए थे। तत्पश्चात् इस बलिदान की याद में युनेस्को ने 1999 में 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया गया। हमारी मातृभाषा हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और एकता का प्रतीक है।

इसी प्रकार शिक्षिका लक्ष्मी सिसौदिया ने अपने उद्बोधन में बच्चों से कहा कि हमे अपनी मातृभाषा से प्यार करना चाहिए तथा अपनी मातृभाषा का सम्मान करेंगे और उसे आगे बढ़ाऐंगे।

इस अवसर पर संस्था संस्था प्राचार्या श्रीमती वन्दना नायर ने अपने उद्बोधन में कहा कि – माँ, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है। हमारी मूल संस्कृति का प्रमुख अंग मातृभाषा ही है। मातृभाषा से किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान होती है और उसे आगे बढ़ाने में सहायक होती है। नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। मातृभाषा में शिक्षा बालक के मानसिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक होती है। श्रीमती नायर ने विद्यालय परिवार एवं अभिभावकों से आव्हान किया गया कि वे अपने हस्ताक्षर मातृभाषा में करें तथा बैंकों अथवा शासकीय कार्यो में तथा किसी भी कार्यशाला, संगोष्ठी अथवा परिसंवाद में स्वभाषा का प्रयोग करें तथा सम्पर्क अभियान कर दूसरों को भी मातृभाषा का उपयोग करने हेतु अनुरोध किया।

इस अवसर पर संस्था प्राचार्या श्रीमती वन्दना नायर की गरिमामयी उपस्थिति में समस्त स्टाप एवं बच्चें उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका सुनिता तनपुरे द्वारा किया गया।

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