
गंगा के कटान और बाढ़ से जूझ रहे खादर क्षेत्र के बस्तौरा गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार को सामूहिक रूप से एडीएम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक जल समाधि लेकर आंदोलन को और बड़ा रूप देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार की बाढ़ ने उनकी खेती पूरी तरह चौपट कर दी है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो गईं, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से किसानों का कर्ज माफ करने और फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के पास अब रहने तक की जगह सुरक्षित नहीं बची है। ऐसे में उन्हें तुरंत पुनर्वास के लिए सुरक्षित जगह पर जमीन उपलब्ध कराई जाए। ज्ञापन में ग्रामीणों ने गंगा के लगातार कटान से गांव की जर्जर होती स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि भीमकुंड से जलालपुर जोरा तक तटबंध का निर्माण कराया जाए, जिससे भविष्य में बस्तौरा समेत आसपास के गांव बाढ़ की मार से सुरक्षित रह सकें। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल गंगा का कटान उनकी जिंदगी और रोज़गार पर भारी पड़ता है, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन देकर पीछे हट जाता है। इस बार वे केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगे। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर प्रशासन उनकी समस्याओं की गंभीरता को जल्द नहीं समझता तो उन्हें कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में गहरी नाराजगी है और ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।










