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कथा का उदेश्य राष्ट्र जागरण होना चाहिए _त्रिलोक तिरोले

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कथा का उदेश्य राष्ट्र जागरण होना चाहिए _त्रिलोक तिरोले
खण्डवा//कोठी(ओंकारेश्वर) स्थित परम शक्ति पीठ आश्रम में पूज्य दीदी साध्वी माँ ऋतुम्भरा जी के आशीर्वाद से, एवं परम आदरणीया साध्वी साक्षी चेतना दीदी के मार्गदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से पधारी भविष्य की कथावाचकाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्या भारती की ग्रामीण शिक्षा के मालवा प्रान्त के प्रान्त प्रमुख श्री त्रिलोक तिरोले ने अपने प्रवचन में कहा की कथा का उदेश्य समाज में जीवन मूल्य की स्थापना के साथ साथ व्यक्ति के राष्ट्रीय चरित्र से होना चाहिए, कथा राष्ट्र जागरण का माध्यम होना चाहिए, श्री तिरोले ने धर्म एवं सम्पदाय में अंतर बताते हुए कहा कि धर्म ईश्वर प्रदत है, धर्म हमें प्रकति से प्राप्त हुआ हैं. धर्म सनातन हैं, जबकि सम्पदाय व्यक्ति निमित्त हैं, सम्पदाय का अंत हो सकता हैं, धर्म का नहीं, दया, प्रेम, करुणा, सेवा,समर्पण , त्याग बलिदान, जैसे जीवन मूल्य सनातन धर्म की पहचान हैं. धर्ममय जीवन मोक्ष की और ले जाता हैं,इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण पटेल मुकेश पाटिल उपस्थित रहे

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