
रक्षाबंधन पर विद्यार्थियों ने वृक्षों को बाँधी राखी, लिया संरक्षण का संकल्प
खण्डवा, 27 अगस्त।
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा रक्षाबंधन पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए जनभागीदारी के साथ आयोजन किए जाने के निर्देशों के क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक मोती लाल नेहरू विद्यालय में माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों ने अनूठी पहल करते हुए वृक्षों को राखी बाँधी और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वयं रंग-बिरंगी राखियाँ तैयार कीं और विद्यालय परिसर में स्थित वृक्षों को राखी बाँधकर उन्हें अपना प्रकृति-भाई मानते हुए सदैव उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने कहा कि जिस प्रकार भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का वचन देते हैं, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन की रक्षा करते हैं। इसलिए वृक्षों की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
इस नवाचार के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का व्यवहारिक पाठ पढ़ाने वाली नवाचारी शिक्षिका हर्षा शर्मा ने कहा कि “रक्षाबंधन केवल मनुष्यों के बीच प्रेम और सुरक्षा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का अवसर भी है। जब बच्चे स्वयं वृक्षों को राखी बाँधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण उनके लिए केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं रहता, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी बन जाता है।”
प्राचार्य मनीषा कास्बी ने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय सरोकारों से जोड़ने के लिए निरंतर नवाचार किए जा रहे हैं। वृक्षों को राखी बाँधने की यह गतिविधि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना विकसित करने की दिशा में सार्थक प्रयास है।
इस अवसर पर माध्यमिक प्रभारी चंद्रकला चौधरी ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन के आधार हैं। विद्यार्थियों द्वारा वृक्षों को राखी बाँधना एक सुंदर प्रतीकात्मक पहल है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पौधों की नियमित देखभाल करने और अधिक से अधिक लोगों को वृक्ष संरक्षण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में माध्यमिक स्टाफ भावना साध, चंद्रेश दीक्षित, आमना शेख एवं फहमीदा शेख सहित विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विद्यालय की यह पहल रक्षाबंधन के पर्व को ‘भाई-बहन के रिश्ते’ से आगे बढ़ाकर ‘मानव और प्रकृति के रिश्ते’ से जोड़ने का प्रेरक संदेश देती है।










