*डमी एडमिशन और कोचिंग संस्कृति पर रोक लगाने की मांग*
*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और बाल अधिकार आयोग अध्यक्ष को लिखा पत्र*
खंडवा
बाल कल्याण समिति खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने प्रदेश में बढ़ती डमी एडमिशन एवं कोचिंग आधारित शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह तथा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर निवेदिता शर्मा को पत्र लिखकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
प्रेषित पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नियमित विद्यालयी शिक्षा से दूर होकर केवल नीट, जेईई एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डमी एडमिशन ले रहे हैं। इससे विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित हो रही है तथा विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
प्रवीण शर्मा ने पत्र में उल्लेख किया कि कम आयु में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और लगातार अध्ययन के दबाव के कारण विद्यार्थियों में तनाव, अवसाद, चिंता एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विद्यालय केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कार, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा भी डमी एडमिशन एवं अनियमित उपस्थिति को लेकर सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में भी प्रभावी नीति एवं निगरानी व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है।
प्रवीण शर्मा ने शासन से मांग की है कि प्रदेश में डमी एडमिशन व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए, 11वीं एवं 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की नियमित विद्यालय उपस्थिति अनिवार्य की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों एवं कोचिंग संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श एवं तनाव प्रबंधन हेतु विशेष अभियान संचालित किए जाने की भी मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल संरक्षण संस्थाओं के समन्वय से बच्चों के हित में समग्र नीति बनाई जाना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित, संतुलित एवं स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
प्रवीण शर्मा ने कहा कि यह विषय केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित बचपन, मानसिक स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील सामाजिक विषय है, जिस पर सरकार को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है।
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