
*मां की ममता और पिता की क्षमता को भगवान भी चैलेंज नहीं कर सकता, ललित प्रभ जी

कैंची काटने का कार्य करती हे इसलिए दर्जी के पैर के नीचे रहती है और सुई जोड़ने का कार्य करती हे इसलिए दर्जी की माथे पर पगड़ी में रहती हे
दूध का सार हे मलाई और जीवन का सार हे भलाई, ,शांति प्रिय सागर जी,
जहां बेटे-बहू सोने से पहले बड़े-बुजुर्गों के पाँव दबाते हैं वहां रोज दीवाली है, ,,राष्ट्र-संत श्री ललित प्रभ जी,,
खंडवा। साधु संत चलते-फिरते तीर्थ के समान होते हैं, जब भी संतों का नगर में आगमन हो उनका अभिनंदन कर उनके प्रवचनो का लाभ लेकर अपने जीवन को सुधारे। संत जहां अपने कल्याण के लिए प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं, वही प्रवचनों के माध्यम से धर्म प्रभावना कर व्यक्ति के जीवन को भी सुधरने का प्रयास करते हैं। कुछ समय के लिए संत हमारे द्वार नगर मैं आए हैं उनके सत्संग को का लाभ लेकर मन में शांति एवं पुण्य की प्राप्ति हम सभी करें। समाज के प्रचार मंत्री चंद्रकांत सांड, सुनील जैन ने बताया कि दादाजी की नगरी खंडवा में राष्ट्र-संत ललित ललित प्रभ जी एवं डॉ.शांति सागर जी महाराज द्वारा अनाज मंडी प्रांगण में प्रातः काल जीवन जीने की कला पर प्रवचन दिए जा रहे हैं, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर इसका अमृत पान कर रहे हैं। सकल जैन समाज और जैन युवक महासंघ YMS के तत्वावधान में पुरानी अनाज मंडी, रामकृष्ण गंज में जीने की कला पर 3 दिवसीय विराट प्रवचन माला के दूसरे दिन गुरुवार को घर को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत ललित प्रभ जी महाराज ने कहा की व्यक्ति 84 लाख जीवयोनियों से क्षमा बाद में मांगे, पहले घरवालों से क्षमा मांगने का बड़प्पन दिखाए। केवल उम्र से व्यक्ति बड़ा नहीं होता जो वक्त आने पर झुक जाता है पर परिवार को कभी टूटने नहीं देता वही घर में सबसे बड़ा कहलाता है। अगर आप घर में आपस में नहीं बोलते हैं तो मंदिर के दर्शन, संतों की सेवा और सामायिक का धर्म करने से पहले टूटे रिश्तों को सांधें और गले मिलें अन्यथा सारा धर्म-कर्म निष्फल्ल हो जाएगा। महाराज श्री ने कहा कि कहा कि किसी क्लब के सदस्य बनकर इंसानियत की सेवा न कर पाओ तो दिक्कत नहीं, पहले घरवालों की सेवा करना शुरू करो, कमजोर भाई के काम आओ, इससे बढ़कर इंसानियत की कोई सेवा नहीं हो सकती। जो बाहर जाकर तो सेवा करता है, पर घरवालों को दुत्कारता है ऐसे लोगों को भगवान कभी माफ नहीं करता। इससे पूर्व डॉ मुनि श्री शांति प्रिय सागर जी महाराज ने कहा कि जो दो हाथों से दान देते हैं, विधाता उनकी हजार हाथों से झोलियाँ भरता है। अगर आप रोज देंगे दान तो बहुत जल्दी बन जाएँगे धनवान। दान देने से रुपए कम होते हैं, पर लक्ष्मी की कृपा दुगुनी बरसती है। जैसे धरती में एक बीज बोया जाए तो प्रकृति हजार गुना लौटाती है, वैसे ही दान और कुछ नहीं, समृद्धि पाने का इन्वेस्टमेंट है, जो कई गुना होकर वापस लौट आता है। याद रखें, परोपकार से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है और पीड़ा से बढ़कर कोई पाप नहीं। जैसे बिना डॉक्टर का अस्पताल, बिना मूर्ति का मंदिर, बिना ब्रेक की गाड़ी, बिना पैसे का पर्स, बिना पानी की नदी बेकार है। वैसे ही परोपकार बिना जीवन बेकार है। अगर हम यहाँ किसी का अच्छा कर रहे होते हैं तो मान कर चलिए ऊपर वाला हमारे लिए भी अच्छा कर रहा होता है।
उन्होंने कहा कि एक फैक्ट्री में मजदूर काम करता है, जो मेहनत से रोज के 500 रुपये कमाता है, इंजीनियर काम करता है, जो दिमाग से 5000 रुपये कमाता है, पर एक मालिक भी काम काम करता है, जो किस्मत से 5,00,000 रुपये रोज के कमाता है। इस किस्मत को खोलने का सरल रास्ता है दान। दान देने से हमारी बंद पड़ी भाग्य रेखा खुलनी शुरू हो जाती है।
उन्होंने अमीरों से कहा कि अगर आप अपनी सारी संपत्ति संतानों के लिए छोड़ कर जाएँगे तो आपको दो लोग याद करेंगे, पर आप जनता के लिए कुछ करके चले जाओगे तो आपको हजारों लोग याद करेंगे। जिसके पास ‘भेजा’ होता है, वह कमाना जानता है, पर जिसके पास कलेजा होता है, वही लगाना जानता है। सूरज हमें रोशनी देता है, हम भी तो कुछ देना सीखें। जो कुछ हमें प्रभु से मिला है, उसे बांटकर खाना सीखें। अगर आपके पास दो रोटी है और खाने वाले चार है तो भी मिल बाँटकर खाने का आनंद लीजिए। उन्होंने कहा कि दूध का सार मलाई है, पर जीवन का सार भलाई है। प्रचारक सुनील जैन चंद्रकांत सांड बताया कि तीन दिवसीय व्याख्यान माला में दूसरे दिन मंच संचालन नवनीत बोथरा ने किया और आभार विजय जैन ने माना। कार्यक्रम में विशेष रूप से एस डी एम बजरंग बहादुर, आयोजकगण विजय जैन अभय जैन रोहित मेहता, नवनीत बोथरा, तपन डोंगरे, सुभाष मेहता, मेघराज जैन, वाडीलाल पटेल, सुरेश गंगवाल इंदौर, प्रमोद जैन,सुनील जैन, आलोक सेठी, कांतिलाल जैन, वीरेंद्र जैन, सोभाग सांड, जगदीश चंद चौरै, चंद्र कुमार सांड, नवीश, अंकेश आदित्य बोथरा, पीयूष शीतल चौरड़िया, विपिन कोचर, सिख समाज के धर्म गुरु ज्ञानी जसवीर सिंह, सुजान सिंह राठौर, प्रेमांशु जैन,नारायण बाहेती, अरुण बाहेती, महिलाओं में निर्मला देवी बोथरा, वर्षा बोरा, वैशाली मेहता, प्रिया जैन, शीतल चोपड़ा, सोनल बोथरा के अलावा इंदौर, पंधाना अंकलेश्वर से भी श्रद्धालु विशेष रूप से उपस्थित थे। प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड और सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम में समस्त जैन समाज के साथ समस्त राजस्थानी समाज, गुजराती समाज, मारवाड़ी समाज, सिख समाज के साथ सभी समाजो के श्रद्धालु भाई-बहनों ने भाग लिया।शुक्रवार को सुबह 9.15 से 11.15 बजे तक जिंदगी में मालामाल बनने के चार मंत्र विषय पर विशेष सत्संग प्रवचन होंगे।











