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अपने जीवन को सफल बनाने हेतु वर ,वधू अपने-अपने वचनों को स्मरण मे रखें एवं अनुपालन करें, “आचार्य श्री विभव सागर”

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अपने जीवन को सफल बनाने हेतु वर ,वधू अपने-अपने वचनों को स्मरण मे रखें एवं अनुपालन करें, “आचार्य श्री विभव सागर”

नवकार नगर में जैन संत द्वारा राम कथा पर हो रहे हैं प्रवचन।

खंडवा। अवसर विशेष पर की गई छोटी सी सहायता भी बहुत बड़ी मानी जाती है, महापुरुष सहायता करने के प्रत्येक अवसर का प्रयोग अवश्य करते हैं, श्रीराम उपकारी प्रकृति के थे उन्होंने अनेक जनों का उपकार किया, जिन्होंने परोपकार किया उनका उपकार सदैव मानना चाहिए। उनके प्रति कृतज्ञता अवश्य व्यक्त करना चाहिए। यह उदगार आचार्य विभव सागर महाराज जी ने मुनिसुव्रत दिगंबर जैन मंदिर परिसर नवकार नगर में सुबह के समय आयोजित राम कथा पर आधारित प्रवचन सभा में व्यक्त किये। आचार्य श्री ने कहा कि उपकार करने वाले के उपकार को भूलना श्रेष्ठ है ।वहीं पर उपकारी के उपकार को सदैव मानना चाहिए ।पुण्य और पाप का चक्र दिन और रात की तरह चलता रहता है। अनुकूलता और प्रतिकूलता जीवन में आती रहती हैं,हर्ष और विषाद की स्थिति निर्मित होती रहती है, सदैव साम्य भाव की साधना करना ही श्रेष्ठ है। आचार्य श्री विभवसागर जी ने सीता स्वयंवर के प्रसंग का सुंदर चित्रण किया ।प्रत्येक वीर का शास्त्र स्वयं उसके लिए मंगलभूत होता है। जैन रामायण के अनुसार श्री राम ने धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाई थी उसे तोड़ा नहीं था। भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है। विवाह संस्कार और उसके आदर्श प्रत्येक गृहस्त के लिए अनुकरणीय होना चाहिए,
इनका संरक्षण करना जन सामान्य का कर्तव्य है विवाह वासना का आमंत्रण नहीं। उपासना का मार्ग है,वर और वधू के माता-पिता समान बुद्धि और विचार वाले होते हैं, इस कारण समाधि कहलाते हैं,न्याय पूर्ण ढंग से एकत्र धन संपदा ही समृद्धि प्रदायक होती है, भारतीय संस्कृति में स्त्री का सम्मान सदैव से बरकरार रहा है, ।आचार्य जी ने वर और वधू द्वारा लिए जाने वाले 7/7 वचनों का प्रभावी विवेचन किया, आपने कहा वर एवं वधू अपने-अपने वचनों को याद रखें, सातों वचन सदैव याद रखें, परिवार में शांति ,रिद्धि, सिद्धि समृद्धि चाहिए तो वर एवं वधू अपने-अपने वचनों को याद रखें और पालन करें, गृहस्थ जन सात तत्वों को याद नहीं करें तो चलेगा परंतु सातों वचनों को स्मरण रखना और अनुपालन करना आवश्यक है, प्रत्येक परिवार की पहली अनिवार्यता संतति होना चाहिए संपत्ति नहीं। संतान का इस तरह से लालन पालन करना चाहिए कि वह घर ही नहीं देश चलाने में भी सक्षम बन सके। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि नगर में पहली बार द्वारा लगातार सात दिनों तक प्रवचन के माध्यम से राम कथा का आयोजन चल रहा है कार्यक्रम में चतुर्विद संघ सहित श्रद्धालु जन बड़ी संख्या में उपस्थित उपस्थित होकर कथा एवं प्रवचनों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। समाज के आनंद कुमार जैन, शिक्षक एवं शिक्षाविद ने बताया आचार्य श्री विभव सागर जी ने इंदौर चातुर्मास के दौरान पर्यावरण महाकाव्य का सृजन किया पर्यावरण के विभिन्न आयामों पर केंद्रित यह एक उत्कृष्ट रचना है। के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि रविवार को कार्यक्रम का संचालन प्रदीप छाबड़ा ने किया मंगलाचरण प्रगति जैन एवं पर्व जैन ने किया। दीप प्रचलन प्रज्जवन सुनील जैन एवं साथियों ने किया। परम मुनिभक्त बाल ब्रह्मचारी अर्पित भैया जैन के निवास पर रविवार को आचार्य भगवन 108 श्री विभव सागर महामुनिराज जी की आहारचर्या संपन्न हुई,आहार उपरांत गुरुवर द्वारा भक्तों के निवास पर अपनी चरण सान्निधि प्रदान की व मांगलिक स्वरूप मंगल स्वस्तिक निर्मित किया। आयोजित कार्यक्रम में सुभाष सेठी,विजय सेठी, कैलाश पहाड़िया, पंकज जैन महल, अविनाश जैन, महेश जैन, पंकज सेठी, शिक्षक आनंद जैन, डॉ.पंकज जैन, सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी, मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष पंकज छाबड़ा, सुलभ सेठी, अजय पाटनी, तरुण गंगवाल, मनीष पाटनी, मनीष सेठी, आयुष पटोदी, पियूष पहाड़िया, शैलेंद्र बैनाडा के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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