
*भाव भक्ति श्रद्धा विश्वास से मनाया गया जीवनमुक्त सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब का प्रकाशोत्सव*

खंडवा। सिन्धी कालोनी स्थित सिन्धी सेवा मंडली धर्मशाला में हरे माधव सत्संग परमार्थ समिति कटनी शाखा खंडवा द्वारा सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी का प्रकाशोत्सव हरिराया सतगुरु सांई ईश्वरशाह साहिब जी के पावन कृपादृष्टि में भाव भक्ति श्रद्धा विश्वास से मनाया गया। यह जानकारी देते हुए समिति प्रमुख महेश फतवानी एवं प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि प्रकाशोत्सव की शुरुआत हरेमाधव अमृतवाणी अरदास मेरे सतगुरां हम शरण तेरी आए से की गई। सतगुरु महिमा के गीत शबद, भजन-कीर्तन के पश्चात् हरेमाधव वचन वाणी, सत्संग का वाचन सतगुरु सेवकों ने किया। इस शुभ मौके पर सिंधी सेवा मंडली अध्यक्ष संजय सबनानी, हरेश संतवानी, निर्मल मंगवानी एवं मनोज गेलानी का समिति की ओर से शाल श्रीफल भेंट कर स्वागत सत्कार किया गया। सतगुरु जी की वाणी का भावार्थ करते हुए सतगुरु सेवक महेश फतवानी ने बताया कि साधसंगत जीओ हरिराया सतगुरु पुरुख अगम अगाध अलख अपार साहिब प्रभु में लीन रहता है और काल मन-माया के देश में परम सत्ता परमात्मा हरेमाधव अकह प्रभु के हुकुम से प्रकट होते हैं जिनका मूल उद्देश्य सर्वसांझी आत्माओं को परमतत्व नाम का भेद दे मन के लुभावने रेशों से निकाल परमपिता परमात्मा के देश में ले जाना होता है। शहंशाह सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी का प्रकाट्य सन् 1912 को ज्येष्ठ मास खुम्भ के शुभ दिन हुआ। आपजी सतगुरु शरण में आने के पूर्व दीन-दुखियों की सेवा, वैराग्य प्रेम में मस्त रहते, सदैव खोज होती ऐसे मौलाई, जीवन मुक्त, विदेही मुक्त पूरण सतगुरु की जो शबद नाम के पार की पहुँच रखने वाला पूरण सत्पुरुख हो। सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब सतगुरु बाबा माधवशाह साहिब जी की शरण संगति में रह पावन चरण-कमलों की सेवा तन मन धन से करते और पावन श्रीचरणों में सेवा, बंदगी, शरण संगति में रहने और निभाने की मेहर आशीष मांगतें, क्योंकि आपका दिल संसारी कार्य व्यवहार से पूरी तरह ऊब चुका था। उन्हें जिन सतपुरुख की खोज थी, वह पूर्ण हुई, जब सतगुरु सांई नारायणशाह साहिब जी सतगुरु बाबा माधवशाह साहिब जी के रूबरू हुए, तब बाबा जी ने वचन फरमाए “भाई प्रभा हमारे साथ चलो” (आप जी के जन्म का नाम भाई प्रभा है) आप जी उसी समय बाबा जी के साथ चल पड़े। आपजी ने सतगुरु बाबा माधवशाह साहिब जी की सत्संगति में रह श्री वचनों की कमाई करते हुए गुरुघर की निष्काम सेवा अकर्ता भाव से कर श्री चरणों में प्रेम की लौ रमाई। सतगुरु बाबा माधवशाह साहिब जी परम मौज में फरमाए जाओ! कस्बे के बाहर जो नदी पर पुल बना है वहीं से जाकर कूद जाओ। भाई प्रभा सतगुरु वचनों को शिरोधार्य कर बिना सोच विचार कर पुल पर चढ़ गए और अन्तर में सर्वसमरथ सतगुरु बाबा माधवशाह साहिब जी का ध्यान कर 50 फुट ऊँचे पुल से कूद गए पर हरिराया सतगुरु जी का रक्षात्मक हाथ आपजी पर बना रहा जिससे उन पर खरोच भी नहीं आई। आप साहिबान जी नियमित रुप से सतगुरु श्रीचरणों की सेवा में रमें रहते, आपका समर्पण हिमालय सा विशाल अडिग रहता, आप साहिबान जी विदेही मुक्त पारब्रम्ह सतगुरु की निष्काम सेवा भजन बंदगी कर स्वयं पारब्रम्ह रुप ही हो गए। सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब ने सेवा भक्ति से जो कमाया उससे उन्होंने अनेक परमार्थी उपकार किये उनके अकूत उपकारों की गणना सम्भव नहीं। ऐसे परम उपकारी सिद्ध संत का प्रकाशोत्सव सिन्धी धर्मशाला में विशाल के काटकर धूमधाम से मनाया गया सत्संग पश्चात पधारी हजारों संगतों ने हरेमाधव ब्रम्हभोज भंडारा प्रसाद से मुख पवित्र किया। इस शुभ अवसर पर रामचंद दीवान, पुरूषोत्तम, नरेंद्र फतवानी, भरत धामेजा, सुरेश मलानी, कुमार फतवानी, श्रीचंद तोलानी, निर्मल मंगवानी, रवि, जितू रामलानी, जयराम मेघवानी, गोल्डी फतवानी, मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।








