
**एडिटर/संपादक/तनीश गुप्ता,खण्डवा✍️

*“ओशो की चेतना से आलोकित हुआ खंडवा — ध्यान, प्रेम और जागरूकता की नई लहर”*
खंडवा। समर्थगुरु ध्यान सेवा केंद्र खंडवा में ओशो जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य ध्यानोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ओशो वंदना, शांत ध्वनि ध्यान और ओशो नृत्य–ध्यान से हुई, जिससे पूरा केंद्र सकारात्मक ऊर्जा, मौन और आनंद से भर गया।
प्रवचन में जिला संयोजक स्वामी तथागत प्रवीण ने ओशो के जीवन-दर्शन, ध्यान पद्धति और समाज में उनकी बढ़ती स्वीकार्यता पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि
“ओशो ने जीवन को जागरूकता, प्रेम, स्वतंत्रता और उत्सव के रूप में जीने की प्रेरणा दी। आज समाज में उनकी विचारधारा को तेजी से अपनाया जा रहा है—क्योंकि लोगों को भीतर की शांति, तनाव से मुक्ति और आत्मिक संतुलन की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस हो रही है।”
उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवन की आपाधापी में ओशो का ध्यान विज्ञान युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों और कार्यरत लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
“ओशो के अनुसार सुख और आनंद बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि भीतर की शांति में है,” — यह संदेश आज लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
कार्यक्रम का संचालन स्वामी आनंद देव ने किया। सक्रिय ध्यान, नादब्रह्म, मौन बैठकी और ओशो प्रवचन की प्रस्तुति ने उपस्थित साधकों को गहरी आंतरिक यात्रा का अनुभव कराया।
इस अवसर पर हर्षा मां, ज्योत्सना मां, रीता मां, प्रज्ञा मां, स्वाति दुबे नरेंद्र सोलंकी सहित अनेक साधक उपस्थित रहे और सभी ने ओशो की वाणी, ध्यान विधियों व जीवन-दर्शन को आत्मसात कर नवीन ऊर्जा का अनुभव किया।
कार्यक्रम का समापन केक कटिंग, शांति प्रार्थना और इस संदेश के साथ हुआ—
“प्रेम ही धर्म है, जागरूकता ही मार्ग है, और ध्यान ही मनुष्य का सच्चा उत्सव है।”









