
*शिव जयंती पर गणेश गौशाला पर धर्मसभा का आयोजन हुआ*
खण्डवा//
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परम पूज्य संत नाथ जी महाराज, त्यागी जी महाराज, जादू बाबा, एवं लव जोशी थे
सबसे पहले मंच पर विराजित प्रतिमा श्री शिवाजी महाराज जी को गुलाल एवं माल्यार्पण कर आरती की गई एवं प्रसादी भोग लगाया गया उसके पश्चात महाराज की जीवनी पर प्रकाश डाला गया उनके जन्म से लेकर के अंतिम समय तक बचपन से लेकर छत्रपति की उपाधि मिलने तक *लव जोशी* द्वारा वर्णन किया गय उनके जन्म के लिए उनकी माता जिजाऊ ने मां शिवराय से मन्नत की थी और मन्नत का ही यह फल है कि उनकी गोद भरी और बालक का जन्म हुआ जन्म के बाद माता-पिता को नाम के लिए मंथन करना पडा और मंथन में मां शिवराय के नाम पर बालक का नाम शिवाजी रखा गया जन्म के बाद पिता अपने सैन्य कार्य में व्यस्तता के कारण समय नही दे पाए और मां ने ही पूरा अपना दायित्व निभाया शिवाजी के पालन पोषण करने में और माताजी जो ने ही शिवाजी को गीता ज्ञान रामायण महाभारत महाराणा प्रताप जैसी उनके जीवन के बारे में शिवाजी को शिक्षा प्रदान की गई एवं उनमें शौर्य दृढ़ता देश और जनता के लिए अपना प्रेम बलिदान जैसी भावना और देश के लिए लड़ने का हौसला दिया एवं शिवाजी महाराज ने तीन कामो में महारथी हासिल की थी पहाड़ों पर चढ़ना उतरन जंगलों में निडर ता से रहना और अपने दुश्मनों को गोरिल युद्ध से हमला कर खत्म करना हरण एवं समुद्र में उतारकर युद्ध करना और अपने दुश्मनों को पराजित कर जीत हासिल करना ऐसे निपुण कार्य एवं हिंदू स्वराज के संस्थापक बने एवं औरंगजेब को मारकर छत्रपति शिवाजी महाराज की उपाधि प्राप्त की संत त्यागी जी ने महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला और कहां हमारा देश हिंदू था राष्ट्रहैं हिंदू हैॉ और हिन्दू राष्ट्र रहेगा इस को कोई नहीं झूठला सकता लेकिन हमें अपनी एकता अपने घर से ही लानी होगी तब ही हम बाहर लड़ सकते हैं वरना हम एक ही घर में रहकर दो भाई अलग-अलग कमरों में अलग-अलग खाना खाते हैं तो जब घर में ही एकता ना हो तो हम देश में कैसे एकता ला सकेंगे बहुत ही अच्छा वर्णन किया त्यागी जी महाराज ने एवं युवा वक्त के रूप में साहिल चौहान ने भी उनके जीवन पर बहुत ही सुंदर वर्णन किया और बहुत ही बढ़िया शब्दों बोला एवं मुगल शासको को पराजित किया औरंगज़ेब आदिलशाह जैसे राजाओं के ऊपर कटाक्ष करते हुए बहुत ही सुंदर और जानदार आवाज मे मुगलो को कैसे पराजित किया शिवाजी ंहाराज ने यह सब बताया और जो उनके शब्द रहते थे वह शब्दो का उन्होंने अपने शब्दों से बोलकर सुनाया
सभी के बोलने के बाद महाराज की आरती हुई तो शादी बाती गई एवं संतों का श्रीफल साल से सम्मानित किया गया
बहुत ही बढ़िया आयोजन के कार्यकर्ता पुष्पेंद्र थिटे, मदन निदाने, गोटू शिंदे एवं उनके मित्र मंडली










