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“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हुआ युवा संगम का आयोजन…”

"भारत की संतती ने पूरे विश्व में प्रेम और ज्ञान फैलाया, युवा अवस्था में ही सारे बड़े निर्णय लिए जाते हैं : जाधम"

“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में हुआ युवा संगम का आयोजन…”
“भारत की संतती ने पूरे विश्व में प्रेम और ज्ञान फैलाया, युवा अवस्था में ही सारे बड़े निर्णय लिए जाते हैं : जाधम”

खंडवा : शनिवार को पी.सी.जी कॉलेज ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में युवा संगम कार्यक्रम की शुरुआत शाखा से हुई, जिसमें प्रथम सत्र में 45 मिनट तक शाखा सत्र उसके उपरांत द्वितीय सत्र में 45 मिनट तक युवाओं के बीच टोली सह दैनिक जीवन में देशभक्ति विषय पर चर्चा सत्र आयोजित हुआ…आयोजन में प्रांत से अंकित जी गजकेश्वर प्रांत सहसंयोजक पर्यावरण गतिविधि उपस्थित रहे एवं नगर संघ चालक नवनीत अग्रवाल, एग्रीकल्चर कॉलेज के डिन डॉ. दिलीप हरि रानाडे , परसोना इंस्टिट्यूट के संचालक अजय राजपूत मंचासिन रहे… द्वितीय सत्र के उपरांत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित संघ के प्रचारक मालवा प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख आशीष जी जाधम ने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि “भारत क्या है, महापुरुषों एवं ऋषियों द्वारा किए गए वैचारिक अनुसंधान के बाद लिपिबद्ध किया गया एक राष्ट्र है भारत…भारत में रहने वाले बुद्धिजीवी लोगों ने कहा है कि भौगोलिक दृष्टि से तीन दिशाओं से बना यह त्रिभुज है, वह डिवाइन ट्रेंगल है, इस भूमि का नाम भारत भूमि है, यहां रहने वाले लोग भारतीय हैं, भारत के मायने है ज्ञान से युक्त ज्ञान से रत देश…
दुनिया के कहीं देश हुए उन्होंने अपना विकास संसाधनों का का उपभोग करके किया है उपयोग करके नहीं, उन्होंने अपना विस्तार किया युद्ध करके लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया…भारत का मूल है प्रकाश देने वाला अपने विचारों से प्रकाश देने वाला राष्ट्र जिसका विचार है सर्वे भवन्तु सुखिन:,
प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो…पूरे विश्व को अपना परिवार मानने वाले ऐसे विचारों के बल पर ही भारत का विकास हुआ है, भारत की जो संतती है उसने पूरे विश्व में प्रेम और ज्ञान फैलाया , हमने गणित में महान खोज की लेकिन शून्य का कोई पेटेंट नहीं लिया, पूरी दुनिया की गणितीय गणना आज शून्य पर आधारित है…
भारत के विभिन्न महापुरुष पूरे विश्व में गए प्रेम और मानवता का संदेश दिया, दुनिया में शांति होनी चाहिए और सबके बीच प्रेम होना चाहिए यह भारत का विचार है, यह भारत की आत्मा है, ये भारत का प्रकाश है , ये भारत का ज्ञान है भारत को लोगों ने इसे आत्मसात किया है…
स्वामी रामतीर्थ जब कहते हैं मैं उठता हूं तो भारत उठता है, मैं बैठता हूं तो भारत बैठता है, मेरी यह जो दोनों भुजाएं यह बाहुबल मेरा नहीं है यह भारत का बाहुबल है…यही राष्ट्र की शक्ति है, युवा किसको कहेंगे, यूवा वो है जिसको लगता है ये भारत माता मेरी माता है, इसकी कोई दुर्दशा हो रही है वह मेरी दुर्दशा है, यह राष्ट्र मेरा घर है, युवा वो है जो देश की सब बात को जीता है, हर पीड़ा को अपनी पीड़ा समझता है और उसे ठीक करने का बल रखता है तो हम उसको कहेंगे वो युवा है क्योंकि युवा अवस्था में ही सारे बड़े निर्णय लिए जाते हैं और यह निर्णय होते हैं आर या पार के निर्णय…
संघ के शताब्दी वर्ष में हर युवा को पंच परिवर्तन पर कार्य करना है और इसे अपने जीवन में आत्मसात करना है जिसमें नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, एवं पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से एक शक्तिशाली राष्ट्र के निर्माण में हम सबको अपना योगदान देना है…”

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