
*प्रवीण शर्मा ने कहा* — *“संवेदनशीलता ही बाल संरक्षण की सच्ची दिशा”*
*पॉक्सो एक्ट पर* *कार्यशाला* — *सामाजिक जागरूकता योजना एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजन*
खंडवा। महिला एवं बाल विकास विभाग, खंडवा द्वारा सामाजिक जागरूकता योजना एवं बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किशोर कुमार सभागार में किया गया। इस अवसर पर खंडवा जिले के छात्रावास अधीक्षक, शिक्षकगण, बाल देखरेख संस्थाओं के प्रमुख तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी परियोजना अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला के मुख्य वक्ता प्रवीण शर्मा, अध्यक्ष न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा (प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट समकक्ष) रहे। उन्होंने कहा कि “संवेदनशीलता प्रशासन का पूरक नहीं, बल्कि उसकी आत्मा है। छात्रावास अधीक्षक केवल व्यवस्थापक नहीं, बल्कि बाल सुरक्षा और आत्मविश्वास के संरक्षक होते हैं।” उन्होंने कहा कि बच्चे केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान समाज की सजीव धड़कन हैं। बाल अधिकारों की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है। श्री शर्मा ने छात्रावासों में बाल सुरक्षा नीति लागू करने, साप्ताहिक बाल संवाद बैठकें आयोजित करने, CCTV निगरानी व्यवस्था और बाल हेल्पलाइन 1098 की जानकारी प्रमुख रूप से प्रदर्शित करने की आवश्यकता बताई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से दिलावर सिंह ने पॉक्सो एक्ट के कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी और कहा कि यह कानून बच्चों की गरिमा और सुरक्षा के लिए एक सशक्त ढाल है। समिति अध्यक्ष मोना दफ़्तरी ने आंतरिक परिवाद समिति (Internal Complaint Committee) के गठन, उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी दी तथा प्रत्येक संस्था में इसके गठन की अनिवार्यता पर बल दिया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास अधिकारी रत्ना शर्मा, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग संतोष शुक्ला, बाल कल्याण समिति खंडवा के सदस्य रुचि पाटिल, कविता पटेल एवं स्वप्निल जैन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य एडवोकेट पन्ना गुप्ता एवं कल्पना जायसवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महेश भमोरे ने किया एवं सहयोग शीतल शर्मा द्वारा किया गया। कार्यशाला के समापन पर सभी अधिकारियों एवं अधीक्षकों ने संकल्प लिया कि “हम प्रत्येक बालक की सुरक्षा, सम्मान और विकास के लिए संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करेंगे।”










