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भक्ति, शौर्य और विलाप का संगम: हस्तिनापुर रामलीला

भक्ति और वीरता से भरा मंचन: लक्ष्मण शक्ति से लेकर सुलोचना सती तक

हस्तिनापुर: धर्म नगरी हस्तिनापुर के रामलीला मैदान में चल रहे प्रभु श्री राम के लीला मंचन में आज, 01 अक्टूबर 2025 को भक्ति, त्याग और वीरता से भरे मार्मिक प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। दर्शकों ने भाव-विभोर होकर लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध, मेघनाथ वध, और सुलोचना सती जैसे महत्वपूर्ण दृश्यों को देखा।

आज के मंचन के मुख्य आकर्षण लक्ष्मण शक्ति: इस दृश्य में मेघनाथ के शक्ति बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण का चित्रण इतना हृदयस्पर्शी था कि दर्शक दीर्घा में सन्नाटा छा गया। जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए और लक्ष्मण की मूर्छा टूटी, तो पूरा मैदान ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा।कुंभकरण वध: विशालकाय कुंभकरण के रण में आने और प्रभु श्री राम के साथ हुए भीषण युद्ध को कलाकारों ने अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कुंभकरण की विशालता और उसकी गर्जना ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।मेघनाथ वध: राम और लक्ष्मण की वीरता के सामने जब मेघनाथ (इंद्रजीत) का वध हुआ, तो यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय की ओर इशारा करता दिखा।सुलोचना सती: पति मेघनाथ के वध के बाद सुलोचना के विलाप और उनके सती होने के मार्मिक दृश्य ने सभी की आंखें नम कर दीं। कलाकारों ने त्याग और पतिव्रत धर्म की इस पराकाष्ठा को बखूबी दर्शाया।जनता और पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया रामलीला देखने आए नगर वासियों ने कलाकारों के अभिनय की जमकर सराहना की। एक स्थानीय नागरिक, श्री सुरेश शर्मा ने कहा, “आज का मंचन बहुत ही भावुक कर देने वाला था। खासकर लक्ष्मण शक्ति और सुलोचना सती के दृश्यों ने हमें रामचरितमानस के गहरे मूल्यों से जोड़ा है।” वहीं, श्रीमती अंजना देवी ने कहा, “रामलीला हमारी संस्कृति है, इसे देखकर हमारी नई पीढ़ी को संस्कार मिलते हैं।”

रामलीला समिति के एक पदाधिकारी ने दर्शकों के उत्साह को देखते हुए कहा, “हस्तिनापुर की जनता ने जिस उत्साह और अनुशासन के साथ इस रामलीला का दर्शन किया है, वह प्रेरणादायक है। लोगों की भारी उपस्थिति दर्शाती है कि धर्म और संस्कृति के प्रति उनका कितना गहरा जुड़ाव है। यह जनसमूह हमें आगे भी ऐसे ही आयोजन करने के लिए ऊर्जा देता है।” उन्होंने सभी से शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की

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