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*मध्यप्रदेश निमाड़ी साहित्य अकादमी का गठन हो*

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*मध्यप्रदेश निमाड़ी साहित्य अकादमी का गठन हो*

खण्डवा//मध्यप्रदेश की प्रमुख जनपदीय बोलियों बुंदेली,बघेली के साथ साथ अन्य भाषा मराठी,सिंधी और उर्दू अकादमी भी है लेकिन एक बड़े भू भाग में बोली जानेवाली निमाड़ी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कोई अकादमी नहीं है। मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अखिल निमाड़ लोक परिषद के संयोजक गोविंद शर्मा ने मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग से अनुरोध किया है कि मध्यप्रदेश निमाड़ी साहित्य अकादमी की स्थापना शीघ्र हो।
निमाड़ी शोध के लिए सम्मानित डॉ दिलीप वर्मा ने चिंता व्यक्त की है कि निमाड़ी भित्तिचित्र,लोककला लुप्त होती जा रही है।निमाड़ के यंत्र,पुराने बर्तन और गहनों का संरक्षण कर उसका किसी संस्था में स्थाई संग्रहालय बनाना होगा। निमाड़ी की उपबोलियों और इसके गीत,कथाओं का अभिलेखन करना भी जरूरी है।
अखिल निमाड़ लोक परिषद के वार्षिक समारोह में खंडवा के सम्मानित सदस्यों से संवाद के इस कार्यक्रम में दीपक चाकरे ने अपने ताजा संग्रह दुड़की से कविता पाठ किया वहीं सौम्या मांगरोले ने निमाड़ी गणपति गरबा की प्रस्तुति सौ आलोचना मांगरोले के साथ दी।
राजश्री शर्मा ने महिलाओं को निमाड़ी के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।मीनू तोमर और सुषमा डोंगरे ने निमाड़ी गीत,सुनील चौरे और मंगला चौरे ने निमाड़ी हास्य कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अनिमेष शर्मा का सम्मान भी कीया गया कार्यक्रम में मोरेश्वर राव मंडलोई,सुष्मिता वर्मा,अशोक तारे,हेमंत उपाध्याय,चंदा पाराशर, संध्या पांडे,कामना मांगरोले, ओमप्रकाश मांगरोल,कमल सिंग दसौंधी,राजेश खांडे,शुभम देवड़ा,अर्जुन सिंह राजपूत,विपिन साद,सुधीर देशपांडे,मनोज जोशी एवं अन्य साहित्यकार, लोककर्मी उपस्थित थे।संचालन सत्येंद्र सोहनी एवं आभार सचिव तारकेश्वर चौरे ने प्रकट किया।

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