
आकिंचन्य का विरोधी है परिग्रह – सबसे बड़ा पाप परिग्रह है और आकिंचन सबसे बड़ा धर्म, “विश्रुत सागर जी”

आज अंतिम दिन ब्रह्मचर्य धर्म की होगी पूजा,दोपहर में पर्युषण पर्व की समाप्ति पर निकलेगी शोभायात्रा
खंडवा। जिस प्रकार वृक्षों के पत्तों सींचने से पत्ते नहीं पनपते वरन जड़ को सींचने से ही पत्ते पनपते हैं। उसी प्रकार समस्त अंतरंग, बहिरंग, परिग्रह मिथ्यात्व रूपी जड़ से पनपते हैं। यदि हम चाहते हैं कि पत्ते सुख जाए तो पत्तों को तोड़ने से कुछ नहीं होगा, नवीन पत्ते निकल आएंगे। यदि जड़ काट दी जाए तो फिर समय पाकर पत्ते अपने आप सुख जाएंगे। इसी प्रकार मिथ्यात्व रूपी जड़ का काट देने पर बाकी के परिग्रह समय पाकर स्वत: छुटने लगेंगे। पर्युषण पर्व में आज हम आकिंचन्य धर्म पर चर्चा कर रहे हैं। आकिंचन्य धर्म का धारण करना है अर्थात परिग्रह का त्याग करना है। जिस प्रकार क्षमा का विरोधी क्रोध, मार्दव का विरोधी मान है उसी प्रकार आकिंचन्य धर्म का विरोधी परिग्रह है अर्थात परिग्रह के अभाव से आकिंचन्य धर्म प्रकट होता है उसे पहले समझना आवश्यक है। यह उद्गार पर्युषण पर्व के दौरान उत्तम आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन देते हुए उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उपाध्याय श्री ने कहा कि जब परिग्रह या त्याग की चर्चा चलती है तो हमारा ध्यान ब्राह्य परिग्रह की ओर ही जाता है। मिथ्यात्व, क्रोध, मान, माया, लोभ भी परिग्रह है इस ओर कोई ध्यान ही नहीं देता। क्रोध, मान, लोभ की जब भी बात आएगी तो कहा जाएगा कि यह तो कषाय हैं पर कषायों का भी परिग्रह होता है यह विचार नहीं आता। घोर पापों की जड़ मिथ्यात्व भी एक परिग्रह है जिसके छूटे बिना अन्य परिग्रह छूट ही नहीं सकते। परिग्रह सबसे बड़ा पाप और आकिंचन्य सबसे बड़ा धर्म है। संसार में जितने भी हिंसा, झूठ, चोरी कुशिल आदि होते हैं उन सब का कारण परिग्रह है। उपाध्याय श्री ने कहा कि क्षमा तो क्रोध के अभाव का नाम है। मार्दव मान के, आर्जव माया के तथा शौच लोभ के अभाव का नाम है, पर आकिंचन्य धर्म क्रोध, मान, माया, लोभ, हास्य, रति, अरति, शोक और भय जुगुप्सादि सभी कषायों के अभाव का नाम है। अत: आकिंचन्य धर्म सबसे बड़ा धर्म है। आज तो ब्राह्य परिग्रह में भी रूपए पैसे को ही परिग्रह माना जाता है। धन, धान्यादि की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। हमने पर्युषण पर्व को धार्मिक उत्साह के साथ मनाया है। हम सभी संकल्प ले कि दस धर्मों पर चलकर हम हमारे जीवन को सुधारने का प्रयास करें। मुनि संघ के सानिध्य में संयम और त्याग के पर्युषण पर्व पर प्रतिदिन नित्य नियम पूजन के साथ सामूहिक रूप से भगवान का अभिषेक व शांतिधारा एवं दस धर्मों पर विशेष प्रवचन मुनिसंघ के आयोजित हुए जिसका लाभ सभी सामाजिक बंधुओं ने किया। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि अनंत चतुदर्शी के अवसर पर सराफा पार्श्वनाथ जैन मंदिर में प्रात: 9.45 बजे विशेष बड़ी शांतिधारा होगी। शुक्रवार प्रवचन के दौरान समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र भटयांण ,विजय सेठी ,अविनाश जैन, कैलाश पहाड़िया, पंकज जैन महल, अर्पित भैया ,प्रवीण सेठी, दिलीप पाटौदी, प्रेमांशु चौधरी, सुनील जैन, महेश जैन कांतिलाल जैन, देवेन्द्र सराफ,प्रमोद जैन,सौरभ जैन,अतुल जैन,अजय जैन सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित थे।आज अंतिम दिन ब्रह्मचर्य धर्म की होगी पूजा होगी एवं दोपहर 3 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सराफा से पर्युषण पर्व की समाप्ति पर शहर के विभिन्न मार्गों से निकलेगी शोभायात्रा।








